नई दिल्ली:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच1-बी वीजा के शुल्क में भारी बढ़ोतरी के फैसले ने उद्योग जगत में खलबली मचा दी है। ट्रंप के एलान के बाद कई अमेरिकी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों जो जल्द वापस लौटने के लिए कहा है। माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी और एच-4 वीजा धारकों को निकट भविष्य में अमेरिका में ही रहने की सलाह दी है।

कई कंपनियों ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल

माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों को एक एडवाइजरी ईमेल भेजा है। जिसमें इन वीजा धारकों को समयसीमा से पहले अमेरिका लौट आने के लिए कहा है। इसके अलावा कंपनी ने वर्तमान में अमेरिका से बाहर रहने वाले कर्मचारियों से भी वापस आने का आग्रह भी किया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट द्वारा अपने कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि हम एच-1बी और एच-4 वीजा धारकों को कड़े तौर पर सलाह देते हैं कि वे समय-सीमा से पहले कल ही अमेरिका लौट आएं। यह जानकारी रॉयटर्स ने एक आंतरिक ईमेल का हवाला देते हुए दी है। इसी बीच बिजनेस फर्म जेपी मॉर्गन के इमिग्रेशन काउंसल ने भी एच-1बी वीजा धारकों को अमेरिका में ही बने रहने और अगली सूचना तक अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचने की सलाह दी है।

ट्रंप के फैसले का भारतीयों पर होगा सबसे अधिक असर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत एच1बी वीजा शुल्क को सालाना 100,000 अमेरिकी डॉलर तक बढ़ा दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि देश इस राशि का इस्तेमाल करों में कटौती और कर्ज चुकाने में करेगा। ट्रंप ने कहा, हमें लगता है कि यह बहुत सफल होगा।

ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2023 के बीच स्वीकृत वीजा में 73.7 फीसदी वीजा भारतीयों के थे। चीन 16 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर था। कनाडा 3% के साथ तीसरे स्थान पर, उसके बाद ताइवान (1.3%), दक्षिण कोरिया (1.3%), मैक्सिको (1.2%) और नेपाल, ब्राजील, पाकिस्तान और फिलीपींस (सभी 0.8%) हैं।

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