नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में मादक पदार्थों की तस्करी और विदेशी नागरिकों के अवैध प्रवास के खिलाफ समन्वित कार्रवाई में, दिल्ली पुलिस ने अफ्रीकी देशों के 260 लोगों को पकड़ा है. एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी. “ऑपरेशन क्लीन स्वीप” नाम की पुलिस कार्रवाई रविवार को द्वारका, पश्चिम और बाहरी जिलों में की गई.

संयुक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिमी रेंज) जतिन नरवाल ने कहा, “यह अभियान मादक पदार्थों के खतरे को जड़ से खत्म करने और निर्धारित समय से अधिक समय तक रहने वाले या बिना दस्तावेज वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जारी अभियान का हिस्सा था.” अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई उन कई शिकायतों के बाद की गई है, जिनमें विदेशियों के बिना वैध दस्तावेजों के रहने और मकान मालिकों द्वारा बिना उचित सत्यापन के अपने परिसर को किराये पर देने की शिकायतें मिली थीं.
यह अभियान द्वारका, बिंदापुर, डाबरी, उत्तम नगर, मोहन गार्डन, तिलक नगर, निहाल विहार और अन्य आसपास के इलाकों में एक साथ चलाया गया.

अकेले द्वारका जिले में, अफ्रीकी देशों के 210 लोगों को – जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे – कथित तौर पर बिना वैध दस्तावेजों के रहने और मादक पदार्थ रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पश्चिमी जिला पुलिस ने अफ्रीका से 45 लोगों को हिरासत में लिया, जबकि बाहरी जिला पुलिस ने 21 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया.

उन्होंने कहा, “सत्यापन प्रक्रिया के दौरान कई लोगों के वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी या वे अवैध थे. पकड़े गए कुछ लोगों के पास से मादक पदार्थ भी बरामद किए गए, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल थे.” अधिकारी ने बताया कि कार्रवाई में उन मकान मालिकों को भी निशाना बनाया गया जिन्होंने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना अपने मकान विदेशी नागरिकों को किराए पर दे दिए थे. 25 से ज्यादा मकान मालिकों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं.

पुलिस ने स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत 26 और विदेशी अधिनियम के तहत 14 मामले दर्ज किए हैं, जबकि दस्तावेज सत्यापन और मामला पंजीकरण अभी जारी है. इस अभियान का नेतृत्व पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) द्वारका अंकित सिंह, डीसीपी पश्चिम दराड़े शरद भास्कर और डीसीपी बाहरी सचिन शर्मा ने किया. कुल 30 टीम तैनात की गईं, जिनमें चार एसीपी, 20 निरीक्षक और लगभग 600 पुलिसकर्मी शामिल थे.

म्यांमा के ठगी केंद्रों से भागकर थाईलैंड पहुंचे 197 भारतीयों को स्वदेश लाया गया

भारत ने सोमवार को दो सैन्य विमानों से थाईलैंड से अपने 197 नागरिकों के दूसरे समूह को वापस लाया. कुछ दिन पहले ही ये लोग म्यांमा के कुख्यात ठगी केंद्र से थाईलैंड के सीमा में दाखिल हुए थे. भारत ने बृहस्पतिवार को थाईलैंड से 270 भारतीयों के पहले जत्थे को वापस लाया था. ये भारतीय उन 28 देशों के 1,500 लोगों में शामिल थे, जो म्यांमा के शहर म्यावाड्डी में केके पार्क के साइबर अपराध केंद्र पर छापे के बाद पिछले महीने थाईलैंड भाग गये थे.

बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास ने कहा, ”आज भारतीय वायु सेना के दो विशेष उड़ानों से 197 भारतीय नागरिकों को थाईलैंड के माई सोत से भारत वापस ले जाया गया.” दूतावास ने सोशल मीडिया मंच पर बताया, ”थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने इस अभियान की निगरानी के लिए आज दोपहर माई सोत का दौरा किया.” दूतावास ने कहा कि प्रधानमंत्री ने माई सोत से बंदियों की शीघ्र स्वदेश वापसी के लिए थाईलैंड की ओर से भारत सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की.

भारतीय मिशन ने कहा कि थाई प्रधानमंत्री ने म्यांमा के ठगी केंद्रों से मुक्त कराए गए भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी में थाई अधिकारियों की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन भी दिया. दूतावास ने कहा , ”दोनों पक्षों ने क्षेत्र में साइबर ठगी और मानव तस्करी समेत अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने और इस उद्देश्य के लिए दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच प्रगाढ समन्वय के प्रति अपनी दृ­ढ़ प्रतिबद्धता दोहराई.” उसने कहा, ”आज वापस भेजे गए भारतीय नागरिकों को हाल में म्यांमा के म्यावड्डी से थाईलैंड पहुंचने के बाद माई सोत में हिरासत में ले लिया गया था. वे म्यावड्डी में कथित तौर पर साइबर ठगी केंद्रों में काम कर रहे थे.” थाई अधिकारियों ने इन भारतीयों को थाई आव्रजन कानूनों के उल्लंघन के आरोप में तब हिरासत में लिया था, जब वे अवैध रूप से देश में प्रवेश कर रहे थे.

बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास और चियांग माई स्थित वाणिज्य दूतावास ने इन भारतीयों की स्वदेश वापसी के लिए थाई सरकार की एजेंसियों के साथ समन्वय किया. थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने एक बार फिर भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि वे विदेश में नौकरी के प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले विदेशी नियोक्ताओं की साख परखें और भर्ती एजेंटों एवं कंपनियों के पिछले रिकॉर्ड की जांच कर लें.

दूतावास ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए थाईलैंड में वीज.ा-मुक्त प्रवेश केवल पर्यटन और लघु व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए है और इसका थाईलैंड में रोजगार पाने के लिए दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए. म्यांमा के ये ठगी केंद्र अंतरराष्ट्रीय साइबर घोटालों में शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न देशों के सैकड़ों लोगों की तस्करी करके उन्हें इन केंद्रों में धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया गया. कथित तौर पर ऐसे ही केंद्र कंबोडिया, लाओस, फिलीपीन और मलेशिया में भी हैं.

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