इंफाल. मणिपुर में कई नगा संगठनों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भारत-म्यांमा सीमा पर बाड़ लगाने का काम तुरंत रोकने और 20 दिनों के भीतर मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) बहाल करने का आग्रह किया. नगा संगठनों ने मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की. इनमें यूनाइटेड नगा काउंसिल, ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर, नगा वूमेंस यूनियन और नगा पीपुल्स मूवमेंट फॉर ह्यूमन राइट्स-साउथ शामिल थे. राजभवन ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यूएनसी, एएनएसएएम, एनडब्ल्यूयू और एनपीएमएचआर-एस के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को राज्यपाल भल्ला से मुलाकात की.

बयान में कहा गया है, ”बैठक के दौरान, प्रतिनिधियों ने पहाड़ी क्षेत्रों पर प्रभाव डालने वाले मौजूदा घटनाक्रमों पर चिंता जतायी जिसमें विशेष रूप से मुक्त आवागमन व्यवस्था और सीमा बाड़ लगाना शामिल है.” बयान में कहा गया है कि ”राज्यपाल ने उठाई गई शिकायतों को स्वीकार किया और कहा कि मामले पर विचार किया जाएगा.” मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को निरस्त किए जाने और भारत-म्यांमा सीमा पर बाड़ लगाने के काम में तेजी के ख.लिाफ. कड़ा विरोध व्यक्त करते हुए, नगा नागरिक संगठनों ने कहा कि “नगा आबादी वाले इलाकों में सरकारी कार्यालयों पर धरना देने और नगा आबादी वाले पहाड़ी जिलों में विरोध रैलियां करने सहित कई तरह के विरोध प्रदर्शन किए गए हैं.”

नगा संगठनों ने बीस दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा, ”भारत सरकार को मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को निरस्त करने से संबंधित अधिसूचना/आदेश को तुरंत रद्द करना चाहिए.” दिसंबर 2024 में जारी सरकार के संशोधित सीमा दिशानिर्देश एफएमआर के तहत सीमापार आवाजाही को सीमा से केवल 10 किलोमीटर तक सीमित करते हैं और “बॉर्डर पास” प्रणाली लागू करते हैं. पहले के एफएमआर के तहत, पहाड़ी जनजातियों का प्रत्येक सदस्य, जो भारत का नागरिक है या म्यांमा का नागरिक है और जो सीमा के दोनों ओर 16 किलोमीटर के भीतर किसी भी क्षेत्र का निवासी है, एक वर्ष की वैधता वाले बॉर्डर पास के साथ सीमा पार कर सकता था और प्रति यात्रा दो सप्ताह तक रह सकता था.

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