काठमांडू/बलरामपुर/बहराइच. नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में राजधानी काठमांडू और कुछ अन्य इलाकों में सोमवार को युवाओं ने हिंसक प्रदर्शन किया, जिसके दौरान कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. काठमांडू में हालात को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों को सेना को तैनात करना पड़ा.

काठमांडू में ‘जेन ज.ी’ के बैनर तले स्कूली छात्रों समेत हजारों युवा संसद भवन के सामने इकट्ठा हुए और प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए. नेपाली मीडिया के अनुसार इस हिंसक प्रदर्शन में 14 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, मौतों की आधिकारिक संख्या के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है.

प्रत्यक्षर्दिशयों के अनुसार युवाओं का प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया जब कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा. अस्पताल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ‘हिमालयन टाइम्स’ अखबार ने बताया कि काठमांडू में हुए प्रदर्शन में 14 लोगों की मौत हो गई.

‘हिमालयन टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक मृतकों में छह लोग ट्रॉमा सेंटर, तीन सिविल अस्पताल, तीन एवरेस्ट अस्पताल, एक काठमांडू मेडिकल कॉलेज (केएमसी) और एक त्रिभुवन यूनिर्विसटी टीचिंग अस्पताल में है. न्यूज पोर्टल खबरहब ने स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि ‘जेन ज.ी’ आंदोलन में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है. नेपाल पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि दो सुरक्षार्किमयों समेत 42 लोग घायल हुए हैं और उनका इलाज वर्तमान में काठमांडू के सिविल अस्पताल में चल रहा है. सैन्य अधिकारियों ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को तैनात किया गया है. हिंसा के बाद स्थानीय प्रशासन ने राजधानी के कई हिस्सों में कफ्र्यू लगा दिया. यह विरोध प्रदर्शन दूसरे शहरों में भी फैल गया है.

काठमांडू जिला प्रशासन ने संसद भवन के आसपास के क्षेत्रों में अशांति को रोकने के लिए अपराह्न 12:30 बजे से रात 10:00 बजे तक निषेधाज्ञा लागू की. मुख्य जिला अधिकारी छबि लाल रिजाल ने एक नोटिस में कहा, ”प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों के आवागमन, प्रदर्शन, बैठक, सभा या धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी.” स्थानीय प्रशासन ने बाद में ये प्रतिबंधात्मक आदेश राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में भी लागू कर दिए.

नेपाल सरकार ने अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर चार सितंबर को फेसबुक, व्हाट्सऐप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध उन्हें विनियमित करने के लिए लगाया गया है, लेकिन आम जनता में धारणा यह है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला होगा और सेंसरशिप की नौबत आ सकती है. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश में अपंजीकृत सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाने के अपने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए रविवार को कहा कि “राष्ट्र को कमजोर किए जाने के प्रयास कभी बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.”

नेपाल के आंदोलन के मद्देनजर उप्र के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा और सतर्कता बढ़ी

पड़ोसी देश नेपाल में शुरू हुए युवाओं के हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और विशेष सतर्कता बरती जा रही है. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. उत्तर प्रदेश के महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिलों की सीमा नेपाल सीमा लगती है, जहां सशस्त्र सीमा बल और स्थानीय पुलिस सुरक्षा निगरानी करती हैं.

बलरामपुर जिले में नेपाल में चल रहे आंदोलन को देखते हुए सीमा की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उधर से आने जाने वालों की कड़ी नजर रखी जा रही है. बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विकास कुमार ने सोमवार को बताया कि नेपाल में चल रहे आंदोलन को देखते हुए सीमा की सुरक्षा बढ़ा दी गई है तथा खुफिया एजेंसियों को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है. उन्होंने बताया कि नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में सभी पुलिसर्किमयों को सतर्कता बरतने के विशेष निर्देश दिए गए हैं. कुमार ने बताया कि सीमा से लगे सभी थानों पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है.

पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में सोशल मीडिया मंचों पर लगे प्रतिबंध के बाद फैले बवाल के चलते बहराइच में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने भारत नेपाल सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी है. नेपाल में लगे प्रतिबंध से सीमावर्ती भारतीय क्षेत्र में रह रहे भारतीयों में भी भारी निराशा है.
नेपाल सरकार ने तीन सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाया था. इस प्रतिबंध के बाद 18 से 30 साल के युवाओं की अगुआई में नेपाल के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन शुरू हो गये, जिसने बाद में हिंसक रूख अख्तियार कर लिया.

सशस्त्र सीमा बल 42 वीं वाहिनी के सेनानायक गंगा सिंह उदावत ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,”बहराइच जनपद से सटे नेपाली इलाकों में विशेष अशांति की खबर नहीं थी. रूपईडीहा बार्डर से सटे नेपाल राष्ट्र के नेपालगंज कस्बे में हल्के-फुल्के विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिली थी. यहां से काफी दूर स्थित नेपाली क्षेत्रों में बड़ी अशांति की खबरें मिली हैं. इसके मद्देनजर हमने अपने इलाके में एहतियातन सीमा पर गश्ती बढ़ा दी है. ” उन्होंने बताया,”नेपाल से आने जाने वाले मुख्य मार्गों के अतिरिक्त गांवों एवं जंगल से नेपाल को जोड़ने वाली पगडंडियों पर नाकों की संख्या बढ़ाई गयी है. एसएसबी के जवानों को सीमा पर 24 घंटे गश्ती के निर्देश दिए गये हैं. सीमा पर तैनात श्वान दस्ते, ‘फेस रिकाग्निशन डिवाइस’ तथा ‘आटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर डिवाइस’ पर तैनात तकनीकी विशेषज्ञ जवानों को खास सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.”

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