नयी दिल्ली: सरकार ने शुक्रवार को बताया कि नयी वंदे भारत तथा अमृत भारत ट्रेनों को दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा को दिए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वंदे भारत ट्रेनों के पहले और अंतिम डिब्बों में व्हीलचेयर की सुविधा, अधिक स्थान वाले दिव्यांगजन अनुकूल शौचालय आदि विशेष प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि वंदे भारत ट्रेनों के पहले और अंतिम डिब्बों में आसानी से चढ़ने और उतरने के लिए मॉड्यूलर रैम्प की व्यवस्था भी की गई है तथा अमृत भारत ट्रेनों के लगेज सह दिव्यांगजन कोचों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

वैष्णव ने बताया कि यात्रियों की सुविधा और आराम को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे विभिन्न प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इसमें दिव्यांगजनों के लिए लगभग सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में अलग से कोच आरक्षित किए गए हैं। इन डिब्बों में चौड़े दरवाजे, चौड़ी बर्थ, बड़ा शौचालय, व्हीलचेयर के लिए अलग से स्थान, सहारे के लिए ग्रैब रेल, तथा उचित ऊंचाई पर वॉश बेसिन और शीशा आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

रेल मंत्री ने बताया कि दृष्टिबाधित यात्रियों की सुविधा के लिए ब्रेल लिपि वाले संकेतक भी कोचों में लगाए गए हैं। वैष्णव ने आगे बताया कि भारतीय रेलवे समाज के सभी वर्गों की यात्रा संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कोचों को डिजाइन और विकसित करता है, ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव हो सके। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाता।

उन्होंने बताया कि आरक्षित डिब्बों में प्रवेश और निकास के स्थानों को “एंट्री” और “एग्जिट” संकेतकों द्वारा दर्शाया जाता है। उनके अनुसार, सामान्य कोचों में किसी भी दरवाजे से प्रवेश और निकास संभव है तथा सभी डिब्बों के दरवाजों के पास पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की जाती है ताकि यात्रियों को सुविधा हो।

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