नागपुर. महाराष्ट्र के नागपुर की रहने वाली सुनीता जामगड़े के मोबाइल फोन में संदिग्ध ‘स्पाइवेयर’ जैसे ऐप (एप्लिकेशन) मिले हैं. पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि सुनीता को पिछले महीने पाकिस्तान द्वारा वापस भेजे के बाद जासूसी के आरोप में हिरासत में लिया गया था.

अधिकारियों ने बताया कि 43 वर्षीय महिला के पाकिस्तान में घुसने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता पैदा कर दी है. एजेंसियां जासूसी से जुड़े संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं. कपिलनगर थाने के एक अधिकारी ने बताया, “पुलिस को उसके (सुनीता के) फोन में कई संदिग्ध एप्लिकेशन मिले हैं, जिनके ‘स्पाइवेयर’ होने का संदेह है. इन ऐप का मकसद जानने के लिए उनका विश्लेषण किया जा रहा है.”

उन्होंने बताया, “अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या महिला का कोई साथी था, जिसने उसे पाकिस्तान जाने में मदद की. उसके मकसद, ऐप और उसकी फोन पर हुई बातचीत की प्रकृति के पीछे की सच्चाई विस्तृत फोरेंसिक और खुफिया जांच के बाद ही सामने आएगी.” पुलिस के मुताबिक, सुनीता कारगिल के हुंदरमन गांव से पाकिस्तान में कथित तौर पर घुसी थी, जो लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा है.

पुलिस ने पहले बताया था कि सुनीता चार मई को अपने 13 वर्षीय बेटे के साथ नागपुर से निकली थी और कारगिल पहुंची, जहां से वह 14 मई को पाकिस्तान चली गई थी. पुलिस के मुताबिक, सुनीता ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करने से पहले अपने बेटे को एक होटल में कथित तौर पर छोड़ दिया था.

पुलिस ने बताया कि सीमा पार करने के बाद पाकिस्तानी सेना ने सुनीता को पकड़ लिया और उसे हिरासत में रखा, जब तक कि उसे आधिकारिक तौर पर भारतीय अधिकारियों को नहीं सौंप दिया गया. प्रारंभिक जांच से पता चला कि सुनीता लापता होने से पहले दो पाकिस्तानी नागरिकों के संपर्क में थी, जिनकी पहचान जुल्फिकार और पास्टर के रूप में हुई है. अमृतसर पुलिस ने एक ‘जीरो’ प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसे बाद नागपुर के कपिल नगर थाने में स्थानांतरित कर दिया गया. मामले की जांच के लिए लद्दाख के कारगिल से एक टीम भी सोमवार रात नागपुर पहुंची.

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