नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के लिए राजस्व खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, सरल और युक्तिसंगत बनाने के लिए एक नये ढांचे को मंजूरी दी है. रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि रक्षा खरीद नियमावली (डीपीएम) 2025 का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच एकजुटता को बढ़ावा देना और राजस्व खरीद के लिए त्वरित निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से सैन्य तैयारियों के उच्चतम स्तर को बनाए रखने में मदद करना है. इसमें कहा गया है, ”यह (डीपीएम) सशस्त्र बलों को आवश्यक संसाधनों की समय पर और उचित लागत पर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा.

बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्री सिंह ने डीपीएम को मंजूरी दी जो ”रक्षा मंत्रालय में राजस्व खरीद प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित, सरल, सक्षम और युक्तिसंगत बनाएगा और आधुनिक युद्ध के युग में सशस्त्र बलों की उभरती आवश्यकताओं को पूरा करेगा.” मंत्रालय ने कहा कि इस दस्तावेज में व्यापार में सुगमता को और मजबूत किया गया है, जिसका उद्देश्य रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है.

मंत्रालय ने बयान में कहा, ”इसका उद्देश्य निजी कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्ट-अप आदि के साथ-साथ रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करके रक्षा क्षेत्र में घरेलू बाजार की क्षमता, विशेषज्ञता और योग्यता का उपयोग करना है.” रक्षा सेवाओं और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत अन्य संगठनों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की खरीद डीपीएम द्वारा विनियमित की जाती है. इसे 2009 में आखिरी बार लागू किया गया था. यह नियमावली सशस्त्र बलों और अन्य हितधारकों के परामर्श से मंत्रालय में संशोधन के अधीन थी.

मंत्रालय ने कहा, ”डीपीएम चालू वित्त वर्ष के लिए मंत्रालय में लगभग एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की सभी राजस्व खरीद के लिए सिद्धांत और प्रावधान निर्धारित करता है.” इसने कहा, ” इस नियमावली को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में नवीनतम विकास के साथ संरेखित करने की अत्यधिक आवश्यकता रही है ताकि खरीद में प्रौद्योगिकी का उपयोग बहुत निष्पक्षता, पारर्दिशता और जवाबदेही के साथ सुनिश्चित हो सके.”

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