रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राष्ट्र व समाज के नव निर्माण में आदिवासी समाज के अमर शहीदों एवं महापुरूषों का अद्वितीय योगदान है. उन्होंने कहा कि जब-जब राष्ट्र व समाज पर विपत्ति आई है, आदिवासी समाज ने उनका डटकर मुकाबला कर विघटनकारी तत्वों को मुहतोड़ जवाब दिया है. मुख्यमंत्री साय आज बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के ग्राम कर्रेझर में आयोजित विराट वीर मेला महोत्सव को सम्बोबिधत कर रहे थे. मुख्यमंत्री साय ने तीन दिवसीय विराट वीर मेला के अंतिम दिवस पर आयोजित शहीद वीर नारायण सिंह श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर अमर शहीद वीरनारायण सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि दी.

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम कर्रेझर में मेला स्थल के समीप तालाब निर्माण हेतु 15 लाख, मेला आयोजन हेतु आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा प्रदान कि जाने वाली 10 लाख रूपये की सहयोग राशि को बढ़ाकर 20 लाख रूपये करने तथा राजाराव पठार स्थित देवस्थल में किचन शेड निर्माण करने की घोषणा की. इसके अलावा उन्होंने मेला स्थल पर कुल 71 लाख 93 हजार रूपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने की. आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक आशाराम नेताम विशेष रूप से उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री साय ने आदिवासियों के हितों के संरक्षण एवं देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाने हेतु पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योगदानांे का उल्लेख किया. मुख्यमंत्री साय ने भगवान बिरसा मुण्डा, शहीद वीर नारायण सिंह एवं गैंदसिंह नायक के अद्म्य वीरता, साहस एवं राष्ट्र भक्ति का उल्लेख करते हुए उसे अतुलनीय बताया. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा मोदी की गारंटी के तहत किए गए सभी वायदों को पूरा किया गया है.

इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधक बने नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की. आदिम जाति कल्याण एवं कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है. वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जिन मुद्दों के लिए हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया, वे आज साकार हो रहे हैं. वन अधिकार की लंबी लड़ाई का परिणाम है कि आज उनके परिजनों को उनका अधिकार मिल रहा है. बस्तर वर्षों पुरानी नक्सली पीड़ा से मुक्त हो रहा है. यहां के लोगों के जीवन में खुशहाली आ रही है. शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्माण और विकास की मजबूत नींव बस्तर में रखी जा रही है.

इस अवसर पर आदिवासी समाज के लोक कलाकारों के द्वारा रेला, मांदरी, हुलकी आदि परंपरागत लोक विधाओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जीवंत प्रस्तुति भी दी गई. इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने आदिवासी समाज के रचनाकार हेमवती ठाकुर के द्वारा रचित पुस्तक ’आदिशक्ति माँ अंगारमोती’ एवं मरई राधेश्याम बस्तरिया की पुस्तक ’घोटुल पुंदाना’ पुस्तक का भी विमोचन किया.

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