राष्ट्रवाणी: Plastic Egg Myth Vs Reality Facts: अंडा भारत ही नहीं, दुनियाभर में खाया जाने वाला एक आम और पौष्टिक खाद्य पदार्थ है. नाश्ते से लेकर अलग-अलग तरह की रेसिपी तक, अंडे का इस्तेमाल रोजमर्रा के खाने में खूब किया जाता है. इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन के साथ कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स भी पाए जाते हैं. लेकिन मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बाजार में मिलने वाले अंडों की गुणवत्ता को लेकर भी लोगों के मन में सवाल उठते रहते हैं. सोशल मीडिया पर समय-समय पर प्लास्टिक या नकली अंडों से जुड़े वीडियो भी वायरल होते रहते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर असली और नकली अंडे की पहचान कैसे की जाए?

क्या घर पर इसे आसानी से जांचा जा सकता है? क्या होते हैं नकली या प्लास्टिक अंडे? नकली या प्लास्टिक अंडे ऐसे मानव निर्मित उत्पाद माने जाते हैं, जिन्हें केमिकल, रेजिन या प्लास्टिक जैसी चीजों से तैयार करके असली अंडे जैसा दिखाने की कोशिश की जाती है. इनमें वास्तविक अंडे का पदार्थ नहीं होता. हालांकि, बाजार में बड़े पैमाने पर नकली अंडे बिकने के मामले आम नहीं हैं. कई बार जो अंडा देखने या इस्तेमाल करने में सामान्य से अलग लगता है, उसके पीछे उसकी खराब स्टोरेज, पुराना होना या दूसरे कारण हो सकते हैं. इसलिए केवल अंडे के अलग दिखने से उसे नकली मान लेना सही नहीं है. अंडे प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत हैं. इनमें मौजूद प्रोटीन शरीर की ग्रोथ, मसल्स की मरम्मत और सामान्य शारीरिक कार्यों के लिए जरूरी होता है. एक अंडे में लगभग 6-7 ग्राम प्रोटीन हो सकता है. अंडों में मौजूद विटामिन D और फॉस्फोरस हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. यही वजह है कि बच्चों, एथलीट्स और बुजुर्गों के लिए भी अंडे पोषण का अच्छा हिस्सा हो सकते हैं. हालांकि, खराब तरीके से स्टोर किए गए या खराब हो चुके अंडे खाने से फूड पॉइजनिंग, पेट में संक्रमण और डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को फूड-बॉर्न इलनेस का खतरा ज्यादा हो सकता है. इसलिए अंडे की ताजगी और सही तरीके से रखे जाने पर ध्यान देना जरूरी है. अंडा असली है या नहीं, घर पर कैसे चेक करें?

पूरी तरह यह साबित करने के लिए कि कोई अंडा नकली है या असली, लैब टेस्टिंग सबसे भरोसेमंद तरीका है. लेकिन घर पर अंडे की ताजगी और उसकी सामान्य गुणवत्ता का अंदाजा लगाने के लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं. अंडे को कान के पास ले जाकर हल्के हाथ से हिलाकर देखा जा सकता है. ताजे अंडे में आमतौर पर ज्यादा आवाज या अंदर कुछ हिलने जैसा महसूस नहीं होता. वहीं पुराने अंडे में अंदर बदलाव होने की वजह से हल्की आवाज या तरल के हिलने का एहसास हो सकता है. असली अंडे के छिलके की सतह आमतौर पर हल्की खुरदरी या दानेदार हो सकती है. अगर अंडे असामान्य रूप से बहुत चिकने, चमकदार या मोम जैसे लग रहे हों, तो उनकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए. हालांकि, केवल सतह देखकर अंडे को नकली साबित नहीं किया जा सकता. अंडा खराब होने पर उसमें अप्रिय या तेज गंध आ सकती है. कई बार अंडा तोड़ने से पहले भी खराब गुणवत्ता का संकेत मिल सकता है. अगर अंडे से असामान्य गंध आ रही है, तो उसे खाने से बचना बेहतर है. क्या अंडे के छिलके का रंग असली या नकली होने का संकेत है?

अंडे के छिलके का रंग मुर्गी की नस्ल और उसके प्रकार पर निर्भर करता है. अंडे सफेद, ऑफ-व्हाइट, हल्के भूरे या गहरे भूरे रंग के हो सकते हैं. इसलिए केवल छिलके का रंग देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि अंडा असली है या नकली. अगर अंडे असामान्य रूप से बहुत ज्यादा पॉलिश किए हुए लगें या उनके रंग और टेक्सचर में एक जैसी अस्वाभाविक चमक दिखाई दे, तो उनकी गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा सकता है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

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