राष्ट्रवाणी: मनोज यादव, कोरबा। 25 सितंबर 2026 को प्रस्तावित सेकल की पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले भिलाई खुर्द सहित आसपास के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने विरोध जताया है। पूर्व में ग्रामीणों के विरोध के चलते जनसुनवाई स्थगित की गई थी। अब दोबारा तारीख तय होने से भू-विस्थापित ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने बैठक कर अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वर्ष 1963-64 में अधिग्रहित जमीन के एवज में लंबित मुआवजा और रोजगार देने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि कुछ परिवारों को भूमि अधिग्रहण के बावजूद सेकल में रोजगार नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि 25 सितंबर को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले उनकी लंबित मांगों का निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन परियोजना से प्रभावित परिवारों के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। वर्ष 1963-64 में अधिग्रहित भूमि के बदले पात्र किसानों को सेकल में रोजगार दिया जाए। जिन किसानों को अब तक भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए। प्रभावित परिवारों की लंबित मांगों का जनसुनवाई से पहले समाधान किया जाए। लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें एनगलिश में पढ़ने यहां क्लिक करेंछत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें

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