कोलंबो. श्रीलंका की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले में मंगलवार को जमानत दे दी. सरकारी धन के दुरूपयोग के मामले में पूर्व राष्ट्रपति को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था.
कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट निलुपुली लंकापुरा ने आदेश दिया कि 76 वर्षीय नेता को जमानत दी जाए, जिसके लिए तीन जमानती हो और प्रत्येक 50 लाख श्रीलंकाई रुपये (एलकेआर) की गारंटी दे.

जुलाई 2022 से सितंबर 2024 तक राष्ट्रपति रहे विक्रमसिंघे पर वर्ष 2023 में ब्रिटेन की एक निजी यात्रा के लिए 1.66 करोड़ श्रीलंकाई रुपये (एलकेआर) के दुरुपयोग का आरोप है. इस यात्रा के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी मैत्री के विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में भाग लिया था. विक्रमसिंघे ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि यह एक आधिकारिक यात्रा थी, क्योंकि उन्हें निमंत्रण राष्ट्रपति के रूप में भेजा गया था. विक्रमसिंघे मंगलवार को ‘कोलंबो नेशनल हॉस्पिटल’ की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) से वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में शामिल हुए. इस अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा है.

विक्रमसिंघे के अधिवक्ताओं ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने की अपील की, जबकि सरकारी अधिवक्ताओं ने इस याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि मुकदमा समाप्त होने तक उन्हें हिरासत में रखा जाना चाहिए.

विक्रमसिंघे की मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए उनके अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पूर्व राष्ट्रपति के हृदय की चार मुख्य धमनियों में से तीन अवरुद्ध थीं, उनके हृदय के ऊतकों को नुकसान हुआ है तथा वे लंबे समय से मधुमेह के साथ फेफड़ों के संक्रमण से भी जूझ रहे हैं. अदालत को एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी. दलीलें सुनने के बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत दे दी. अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई अक्टूबर के अंत में फिर से की जाएगी.

विक्रमसिंघे के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि वह अगले कुछ दिनों तक ‘नेशनल हॉस्पिटल’ में उपचार प्राप्त करते रहेंगे.
फोर्ट मजिस्ट्रेट अदालत के चारों ओर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुनवाई हुई. विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए सैकड़ों विपक्षी समर्थक बाहर जमा थे. आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा पांच घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद उन्हें पिछले सप्ताह शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था. श्रीलंका की स्वतंत्रता के बाद गिरफ्तार होने वाले वह पहले पूर्व राष्ट्राध्यक्ष हैं.

फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा 26 अगस्त तक हिरासत पर भेजे जाने के बाद शुक्रवार को आधी रात के करीब उन्हें मैगजीन रिमांड जेल ले जाया गया. शुरुआत में विक्रमसिंघे को जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में निर्जलीकरण के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें नेशनल हॉस्पिटल के आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया. उनके कार्यालय ने उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनके साथ एकजुटता व्यक्त की.

श्रीलंकाई विपक्षी दलों ने विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘राजनीतिक प्रतिशोध की एक घटिया कार्रवाई’ बताया था. सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) पार्टी ने विपक्ष के इस कदम की निंदा करते हुए इसे ‘चुनिंदा सार्वजनिक आक्रोश’ बताया और कहा कि यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है.

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