राष्ट्रवाणी: नितिन नामदेव, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करीब 500 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का झांसा देकर 15 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)) ने कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके श्रीवास्तव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रायपुर की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है।
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 22 सितंबर को केके श्रीवास्तव से जुड़ी 3.25 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अनंतिम रूप से कुर्क की थीं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, मामले की जांच रायपुर के तेलीबांधा थाने में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) और उसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई।
पुलिस केस में केके श्रीवास्तव और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप दर्ज किए गए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, मामला जून 2023 का है। जांच एजेंसी का आरोप है कि केके श्रीवास्तव ने मेसर्स रावत एसोसिएट्स के प्रोपराइटर को भरोसा दिलाया कि रायपुर में करीब 500 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाया जा सकता है।
इसके लिए करीब 15 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा कराने की बात कही गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, इस झांसे में आकर रावत एसोसिएट्स के प्रोपराइटर ने 15 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह रकम एक खाते में भेजने के बजाय पांच अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई।
इन बैंक खातों की जानकारी कथित तौर पर आरोपी की ओर से व्हाट्सऐप के जरिए दी गई थी। जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, एक अहम तथ्य सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए थे, उन्हें कथित तौर पर इन खातों की जानकारी ही नहीं थी। एजेंसी का कहना है कि जिन कंपनियों या संस्थाओं से ये खाते जुड़े थे, वे अपने पंजीकृत पतों पर मौजूद नहीं मिलीं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि 15 करोड़ रुपये की ठगी से हासिल रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय शेल और कंड्यूट संस्थाओं के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग खातों और संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया। एजेंसी के मुताबिक, इस प्रक्रिया के जरिए रकम की वास्तविक प्रकृति और स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि रकम का एक हिस्सा भारत से बाहर भेजा गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, विदेशों में रकम भेजने के लिए लेन-देन को वास्तविक कारोबारी गतिविधि दिखाने की कोशिश की गई। इसके लिए फ्रेट चार्ज और कंटेनर लीजिंग जैसे कारोबारी विवरण का इस्तेमाल किया गया।
एजेंसी के मुताबिक, इस तरीके से रकम दुबई (UAE), हांगकांग, चीन और सिंगापुर में स्थित लाभार्थियों तक भेजी गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, ठगी गई 15 करोड़ रुपये की रकम में से करीब 3.40 करोड़ रुपये पीड़ित को वापस किए गए। हालांकि, एजेंसी का आरोप है कि यह रकम सीधे तौर पर वापस नहीं की गई, बल्कि पहले से लेयर की गई रकम में से भुगतान किया गया और इसे सामान्य कारोबारी भुगतान अथवा वास्तविक पुनर्भुगतान के तौर पर दिखाया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, बाकी करीब 11.60 करोड़ रुपये की रकम अब तक वापस नहीं की गई है। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 जुलाई 2026 को कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके श्रीवास्तव को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया गया था।
इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 22 सितंबर को 3.25 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया। 23 सितंबर 2026 को एजेंसी ने विशेष PMLA अदालत, रायपुर के समक्ष अभियोजन शिकायत दाखिल की। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है।

