राष्ट्रवाणी: जगदलपुर/रायपुरः छत्तीसगढ़ में झीरम पर सजा के बाद भी सवालों का सिलसिला नहीं थम रहा है। कांग्रेस कह रही है न्याय होना चाहिए, दिखावा नहीं। वहीं बीजेपी कह रही है कि इस मुद्दे पर तो कांग्रेस सियासत से बाज आए।
वैसे सियासी बहस को किनारे रख भी दिया जाए तो भी जगदलपुर में 6 आदिवासी संगठनों ने भी बैठकर कर दोषी करार दिए गए। फांसी की सजा वाले 10 दोषियों को बचाने उच्च अदलतों में अपील करने फैसला किया है। इतने जघन्य हत्याकांड में दोषियों के समर्थन के बहाने भी क्या कोई सियासी लाभ लूटने खेल चालू हो गया है?
झीरम कांड पर NIA कोर्ट के फैसले में 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए, फांसी की सजा सुनाई गई है। 13 साल बाद आए इस फैसले के बाद भी इस कांड पर पूरे न्याय की बातें कहते हुए संघर्ष जारी रखने की रणनीति बनाई जा रही है। दोषियों के परिजनों ने साफ कर दिया है कि वो कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे, आगे हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
इसके लिए पैसों का प्रबंध करने जगदलपुर में छह आदिवासी संगठनों ने बैठक कर चंदा जमा कर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने का दावा किया। आदिवासी समाज का आरोप है कि मुख्य साजिशकर्ता आत्मसमर्पण के बाद सरकारी सुविधाओं के साथ बेखौफ, खुली हवा में जी रहे हैं। इधर, रायपुर में छग कांग्रेस ने भी झीरम के फैसले पर सभी सीनियर नेताओं के साथ बैठक की।
PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि, झीरम पर न्याय होना चाहिए ना की न्याय का दिखावा। इस मसले पर जल्द आलाकमान से बात कर न्यायिक लड़ाई की तैयारी करेंगे। कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए डिप्टी मुख्यमंत्री अरूण साव ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से झीरम के नाम पर केवल सियासत करते आए हैं।
यानी झीरम में फैसला जरूर आया है, लेकिन इंसाफ पर बहस खत्म नहीं हुई। एक तरफ आदिवासी समाज तो दूसरी तरफ कांग्रेस दोनों खुद को पीड़ित बताते हुए आगे की लड़ाई की तैयारी में है। सवाल है साजिश का पर्दाफाश करने में वाकई किसी की मंशा है…इसके लिए और कितना इंतजार करना होगा।
