राष्ट्रवाणी: सूरत ने 500 सालों में समुद्री व्यापार और जहाज निर्माण से लेकर टेक्सटाइल और डायमंड उद्योग तक अपना बिजनेस मॉडल …और पढ़ें फिर भी ये शहर कैसे बना डायमंड सिटी? (ai photo) सूरत ने 500 सालों में कई बार बिजनेस मॉडल बदला। कभी समुद्री व्यापार और जहाज निर्माण का प्रमुख केंद्र था।

अब दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड और टेक्सटाइल हब है। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: कभी 84 देशों के जहाजों से गुलजार रहने वाला सूरत (surat) आज कपड़े और हीरों के कारोबार के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। करीब 500 साल के इस सफर में शहर ने कई बार अपनी बिजनेस मॉडल बदला।

कभी समुद्री व्यापार इसकी ताकत था, फिर जहाज बनाने का कारोबार बढ़ा और बाद में मुंबई बंदरगाह के उभरने से सूरत को बड़ा झटका लगा। इसके बाद शहर ने टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री को अपनी नई पहचान बना लिया। गुजरात के तापी नदी के किनारे बसा सूरत 16वीं, 17वीं, और 18वीं शताब्दी में समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र था।

अरब सागर से इसकी नजदीकी और तापी नदी के कारण यहां विदेशी व्यापारियों का आना-जाना बढ़ा। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, सूरत के बंदरगाह पर एक समय 84 से ज्यादा देशों के जहाज आते थे। ब्रिटिश, डच और पुर्तगाली कारोबारियों ने यहां अपने व्यापारिक केंद्र यानी ‘कोठियां’ भी स्थापित की थीं।

सूरत शहर का इतिहास बहुत शानदार रहा है, जो 300 ईसा पूर्व तक पुराना है। इस शहर की शुरुआत 1500-1520 ईस्वी के दौरान ‘सूर्यपुर’ नाम के पुराने हिंदू शहर से हुई थी। बाद में, तापी नदी के किनारे सौवीर के राजा या ‘ब्रिगस’ लोगों ने यहां अपनी बस्ती बसाई।

1759 में, ब्रिटिश शासकों ने मुगलों से इसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और 20वीं सदी की शुरुआत तक उनका ही शासन रहा। सूरत सिर्फ जहाजों का पड़ाव वहीं था, बल्कि यहां जहाज बनाने का भी बड़ा कारोबार था। तापी के किनारे अथवालाइंस से लेकर डुमस तक का इलाका जहाज बनाने वालों के लिए जाना जाता था।

उस दौर में सूरत समुद्री व्यापार के साथ-साथ जहाज निर्माण का भी महत्वपूर्ण केंद्र था। मुगल दौर में सूरत की कारोबारी ताकत और बढ़ी। यह पश्चिमी भारत का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह बना और मक्का जाने वाले यात्रियों के लिए भी अहम पड़ाव था।

1612 में अंग्रेजों ने यहां व्यापारिक केंद्र बनाया और 1614 में ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार के अधिकार मिले। यानी सूरत उस समय भारत और विदेशी बाजारों के बीच एक बड़ा बिजनेस गेटवे बन चुका था। सूरत का समुद्री कारोबार हमेशा एक जैसा नहीं रहा।

मुंबई के बंदरगाह के उभरने के बाद सूरत की पोर्ट इकोनॉमी कमजोर होने लगी और जहाज निर्माण का कारोबार भी धीरे-धीरे घट गया। कई कारोबारी मुंबई की ओर चले गए। एक समय जिस शहर की समृद्धि समुद्री व्यापार पर टिकी थी, उसे नए बिजनेस मॉडल की जरूरत थी।

आज सूरत की पहचान ‘टेक्सटाइल सिटी’ और ‘डायमंड सिटी’ के तौर पर है। शहर की वेबसाइट के मुताबिक, आजादी के बाद शहर में औद्योगिक गतिविधियों, खासकर टेक्सटाइल और ट्रेडिंग का तेजी से विस्तार हुआ। सूरत के टेक्सटाइल बाजारों में साड़ी, ड्रेस मटेरियल, पॉलिएस्टर, सिल्क, प्रिंटेड और एम्ब्रॉयडर्ड फैब्रिक का बड़ा कारोबार है।

इसके साथ ही डायमंड कटिंग-पॉलिशिंग ने सूरत को वैश्विक पहचान दी। सरकारी वेबसाइट सूरत को दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बताती है और यहां 5,000 से ज्यादा डायमंड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स होने का उल्लेख करती है। यानी सूरत की करीब 500 साल की बिजनेस कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है बंदरगाह बदला, जहाजों का कारोबार बदला, लेकिन व्यापार की आदत नहीं बदली।

सूरत ने वक्त के साथ अपना कारोबार बदला और आज समुद्री व्यापार के पुराने केंद्र से टेक्सटाइल और डायमंड के बड़े कारोबारी हब में बदल चुका है।

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version