राष्ट्रवाणी: नई दिल्ली। थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सेना की मध्य कमान की विभिन्न सैन्य संरचनाओं की समीक्षा की है। इस दौरान उन्होंने सेना की ऑपरेशनल तैयारियों महत्वपूर्ण समीक्षा की। लखनऊ स्थित मध्य कमान मुख्यालय में सेना प्रमुख को कमान की परिचालन स्थिति, आधारभूत ढांचे के विकास, आधुनिकीकरण और युद्धक तैयारियों को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी गई।

इसके बाद उन्होंने उत्तर भारत एरिया मुख्यालय का दौरा किया। यहां उन्होंने सैन्य कमांडरों और सैनिकों से मुलाकात की। सेना प्रमुख ने 4 और 5 अगस्त को मध्य कमान की विभिन्न सैन्य संरचनाओं का यह दो दिवसीय दौरा किया। यहां उन्होंने मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य, परिचालन तैयारियों और जारी क्षमता संवर्धन पहलों की समीक्षा की। लखनऊ स्थित मध्य कमान मुख्यालय में सेना प्रमुख ने सभी रैंकों के सैनिकों को संबोधित किया।

सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशनल तैयारी, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता और आत्मनिर्भरता ही सैन्य प्रभावशीलता की आधारशिला हैं। उन्होंने सैनिकों से सतर्क रहने, परिचालन दृष्टि से चुस्त बने रहने और भविष्य की चुनौतियों के लिए हमेशा तैयार रहने का आह्वान किया, ताकि उभरती सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

इस दौरान सेना प्रमुख ने योद्धा सेवा सम्मान से सेवानिवृत्त मेजर जनरल हर्ष काकर, सेवानिवृत्त कर्नल अरविंद सिंह कुशवाहा, सेवानिवृत्त नायब सूबेदार राधे श्याम तथा मानद कैप्टन एवं सेवानिवृत्त रिसालदार मेजर विजय कुमार को सम्मानित किया। उन्हें सामाजिक सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, खेल तथा पूर्व सैनिक कल्याण के क्षेत्र में उ नके उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान सक्रिय सैन्य सेवा के बाद भी राष्ट्र के प्रति उनकी निरंतर सेवा और समर्पण की भावना को मान्यता देता है।

यह दौरा भारतीय सेना के उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों को बनाए रखने तथा तकनीकी रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार सैन्य बल के निर्माण पर उसके निरंतर ध्यान को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि पिछले महीने के अंत में थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा की थी। वह 28 और 29 जुलाई को पूर्वी थिएटर के सैन्य गठन क्षेत्रों के दो दिवसीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सैन्य तैयारियों और शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों की व्यापक समीक्षा की। तब सेना प्रमुख ने मणिपुर की सुरक्षा स्थिति का आकलन किया था।

इसके अलावा विभिन्न सैन्य संरचनाओं की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों से बाढ़ राहत अभियानों की प्रगति की भी जानकारी ली थी।

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