लंदन. ब्रिटेन की सरकार मंगलवार को बीबीसी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विवाद पर विचार करने वाली थी. ट्रंप 2020 के राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद उनके भाषण को संपादित करने के तरीके को लेकर प्रसारक पर मुकदमा करने की धमकी दे रहे हैं.
संस्कृति मंत्री लिसा नंदी ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कारपोरेशन (बीबीसी) संकट पर एक बयान देने वाली थीं, जिसमें आलोचकों ने निगम में बड़े बदलावों की मांग की थी और समर्थकों ने सरकार से ब्रिटेन के सार्वजनिक प्रसारक को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने का आग्रह किया था.

निवर्तमान बीबीसी महानिदेशक टिम डेवी, जिन्होंने इस घोटाले के कारण रविवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की थी, ने कहा कि ब­ढ़ते हमलों के मद्देनजर बीबीसी को “अपनी पत्रकारिता की रक्षा के लिए संघर्ष” की जरूरत है. डेवी ने कर्मचारियों को दिए एक बयान में स्वीकार किया कि, “हमने कुछ गलतियां की हैं, जिनकी हमें कीमत चुकानी पड़ी है”, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें संगठन पर “बहुत गर्व” है.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमें अपनी पत्रकारिता के लिए संघर्ष करना होगा.” ट्रंप के एक वकील ने पिछले साल प्रसारित एक वृत्तचित्र में कथित रूप से अपमानजनक दृश्य को लेकर प्रसारणकर्ता से अपना बयान वापस लेने, माफी मांगने और मुआवजे की मांग की है. वृत्तचित्र के कारण बीबीसी के शीर्ष कार्यकारी अधिकारी डेवी और समाचार प्रमुख डेबोरा टर्नेस को पहले ही अपना पद छोड़ना पड़ा है, दोनों ने प्रसारणकर्ता द्वारा (संपादन में) “निर्णय की त्रुटि” कहे जाने के कारण इस्तीफा दे दिया है. बीबीसी ने छह जनवरी, 2021 को ट्रंप द्वारा दिए गए भाषण के भ्रामक संपादन के लिए माफी मांगी है. उस दिन उनके समर्थकों की भीड़ ने वाशिंगटन में ‘कैपिटल’ (अमेरिकी संसद परिसर) पर धावा बोल दिया.

नवंबर 2024 के अमेरिकी चुनाव से कुछ दिन पहले प्रसारित वृत्तचित्र “ट्रंप: ए सेकंड चांस?” में भाषण के दो खंडों से तीन उद्धरणों को एक साथ जोड़ा गया था, जो लगभग एक घंटे के अंतराल पर दिए गए थे, जिसमें एक उद्धरण प्रतीत होता है जिसमें ट्रंप ने समर्थकों से उनके साथ मार्च करने और “जमकर लड़ने” का आग्रह किया था. संपादित हिस्सों में एक हिस्सा ऐसा भी था जहां ट्रंप ने कहा था कि वह चाहते हैं कि समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करें.

बीबीसी के अध्यक्ष समीर शाह ने कहा कि प्रसारक ने स्वीकार किया है कि “जिस तरह से भाषण को संपादित किया गया, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह सीधे तौर पर हिंसक कार्रवाई का आ”ान था.” बीबीसी ने अभी तक फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के वकील एलेजांद्रो ब्रिटो की इस मांग का औपचारिक रूप से जवाब नहीं दिया है कि वह “झूठे, अपमानजनक, आपत्तिजनक और भड़काऊ बयानों को वापस ले”, माफी मांगे और शुक्रवार तक “राष्ट्रपति ट्रंप को हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजा दे”, या फिर एक अरब अमेरिकी डॉलर के हर्जाने के लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहे. वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों ही सरकारों पर लंबे समय से प्रसारणकर्ता के साथ हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया जाता रहा है. बीबीसी का संचालन एक बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसमें बीबीसी के नामित और सरकार द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि शामिल होते हैं.

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