नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को विकास को समावेशी बनाने और समानता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे और क्रेडिट रेटिंग प्रणालियों में सुधार की जरूरत बतायी. उन्होंने स्पेन के सेविले में विकास के लिए वित्तपोषण (एफएफडी) पर चौथे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आधिकारिक विकास सहायता में गिरावट के रुख में बदलाव के आ”ान का भी समर्थन किया और विकसित देशों से जलवायु वित्त को बढ़ाने का आग्रह किया.

सीतारमण ने कहा कि खासकार नाजुक देशों में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए भरोसेमंद, सरल पहुंच और रियायती वित्त की व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ”भारत समावेशी विकास और समानता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधारों का समर्थन करता है, जिसमें बहुपक्षीय विकास बैंकों (एकडीबी) में सुधार और निष्पक्ष क्रेडिट रेटिंग प्रणाली शामिल हैं. बहुपक्षीय विकास बैंक से दिये जाने वाले कर्ज को दीर्घकालीन विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए और मजबूत निगरानी ढांचे के जरिये इस पर नजर रखी जानी चाहिए ताकि कर्ज राशि का उपयोग उन्हीं मदों में किया जाए, जिसके लिए वे आये हैं.”

सीतारमण ने कहा कि कई देशों के लिए समावेशी और सतत विकास के लिए कर्ज एक संरचनात्मक बाधा बन गया है. भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान शुरू किए गए वैश्विक ‘सॉवरेन डेट’ गोलमेज सम्मेलन ने कर्ज के मामले में पारर्दिशता और ऋण पुनर्गठन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि एहतियाती ऋण प्रबंधन के साथ-साथ जी-20 साझा रूपरेखा का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है.

भारत ने कर प्रणालियों के आधुनिकीकरण और अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी समर्थन किया.
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में व्यापक कर सुधारों और कर प्रशासन में डिजिटल बदलाव ने राजस्व में वृद्धि की है और अनुपालन लागत को कम किया है. उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार लोगों को अपनी विकास रणनीति के केंद्र में रखा है. हमने 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है और लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से समावेशी डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाया है. हालांकि, मजबूत वैश्विक वृद्धि के लिए, राष्ट्रीय प्रयासों के साथ अंतरराष्ट्रीय परिवेश महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि कई सतत विकास लक्ष्य पटरी से उतर गए हैं और विकासशील देशों के लिए वित्तपोषण का अंतर सालाना 4,000 अरब डॉलर से अधिक है. इसलिए तत्काल और परिवर्तनकारी कदम उठाने की आवश्यकता है. सीतारमण ने एक व्यापक, न्यायसंगत और विकासोन्मुख वैश्विक वित्तपोषण ढांचे की जरूरत बतायी, जो देश की परिस्थितियों का सम्मान करता हो, नीतिगत गुंजाइश बनाए रखता हो और सभी के लिए सतत विकास के वादे को पूरा करता हो.

एसबीआई के डिजिटल बदलाव के उपायों से ग्राहकों को काफी लाभ हुआ : सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के डिजिटल बदलाव के लिए उठाए गए कदमों से उसके ग्राहकों को काफी फायदा हुआ है. राष्ट्र की सेवा में 70 वर्ष पूरे करने पर एसबीआई को बधाई देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए बैंक द्वारा नवोन्मेषण और सशक्तीकरण जारी रखने की उम्मीद है.

सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ” 23,000 से अधिक शाखाओं, 78,000 ग्राहक सेवा केंद्रों (सीएसपी) और 64,000 एटीएम के साथ आज एसबीआई की स्थिति बहुत मजबूत है. यह वाकई हर भारतीय का बैंक है. पिछले दशक में इसने जो डिजिटल बदलाव हासिल किया है, वह इसके ग्राहकों के लिए काफी फायदेमंद रहा है.

उन्होंने कहा कि एसबीआई ने 1.5 करोड़ किसानों, महिलाओं द्वारा संचालित 1.3 करोड़ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), पीएम स्वनिधि के तहत 32 लाख रेहड़ी पटरी वालों, 23 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों और विभिन्न योजनाओं के तहत लाखों कारीगरों को सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि एसबीआई के पास 15 करोड़ से अधिक जन धन खाते, 14.65 करोड़ पीएम सुरक्षा बीमा योजना, 1.73 करोड़ अटल पेंशन योजना और सात करोड़ पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना के लाभार्थी हैं.

एसबीआई ने अपनी 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के नवीकरणीय ऊर्जा बदलाव प्रयासों में मदद करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 तक 40 लाख घरों को ”सौर ऊर्जा से संचालित” करने की योजना की घोषणा की है. एसबीआई के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने कहा, ” आज, हम अपने लोगों, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहे हैं ताकि अधिक जिम्मेदारी के साथ एक अरब लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके. हमारा लक्ष्य सिर्फ बड़े पैमाने पर नेतृत्व करना नहीं बल्कि एक उद्देश्य के साथ नेतृत्व करना है…भारत को अधिक न्यायसंगत और मजबूत भविष्य की ओर ले जाना है.” भाषा निहारिका अजय

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