मुंबई. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने इंडिगो संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार को कहा कि विमानन क्षेत्र में बढ़ता एकाधिकार अर्थव्यवस्था के लिए ‘गंभीर खतरा’ है और यात्रियों के हितों को प्रभावित करता है. उन्होंने मांग की कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए संकटग्रस्त इंडिगो को दो कंपनियों में विभाजित किया जाना चाहिए.

चव्हाण ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत में हवाई यात्रा पर अब केवल दो प्रमुख कंपनियों का दबदबा है जिनमें इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है और टाटा समूह (एयर इंडिया और एआई एक्सप्रेस) की बाजार हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है.

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने आगाह करते हुए कहा, ‘‘2004 में भारत में 10 विमानन कंपनियां थीं, लेकिन आज केवल दो बड़ी कंपनियां ही बची हैं. लगभग 40 करोड़ यात्री और केवल दो विमानन कंपनी, यह स्थिति भविष्य में और अधिक गंभीर हो जाएगी.’’ कांग्रेस नेता ने इंडिगो के मौजूदा संकट को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण और हतप्रभ करने वाला’’ करार देते हुए कहा कि यह स्थिति नियामक खामियों और सरकार तथा निजी विमानन कंपनियों के बीच कथित मिलीभगत का परिणाम है. इंडिगो की उड़ानों में गत एक हफ्ते से व्यापक व्यवधान देखा गया है.

चव्हाण ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू के इस्तीफे, इंडिगो के सीईओ को निलंबित करने और चूक के लिए जिम्मेदार नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की. कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा, ‘‘विमानन क्षेत्र में एकाधिकार देश के लिए खतरनाक है.’’ उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे क्षेत्र को निजी कंपनियों के नियंत्रण में नहीं आने देना चाहिए.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विमानन क्षेत्र में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए इंडिगो को दो कंपनियों में विभाजित करने और उनकी बाजार हिस्सेदारी 30-30 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव दिया. चव्हाण ने सुझाव दिया, ‘‘सरकार को पूरे विमानन क्षेत्र को निजी हाथों में नहीं जाने देना चाहिए. उसे अपनी खुद की एक राष्ट्रीय विमानन कंपनी शुरू करनी चाहिए.’’ उन्होंने इंडिगो में अधिक कीमत वाले टिकटों और बड़े पैमाने पर व्यवधानों के कारण नुकसान उठाने वाले यात्रियों की मदद के लिए 1,000 करोड़ रुपये का विशेष मुआवजा कोष स्थापित करने की मांग की.

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