नयी दिल्ली. तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने बुधवार को कहा कि 2029 का लोकसभा चुनाव देश में ओबीसी आरक्षण के लिए एक अग्निपरीक्षा की तरह होगा. उन्होंने केंद्र से ओबीसी आरक्षण की सीमा बढ़ाने और राज्य के जातिगत सर्वेक्षण के अनुसार, उनके लिए 42 प्रतिशत कोटा लागू करने के लिए तेलंगाना मॉडल अपनाने का अनुरोध किया.

रेड्डी ने यहां अपने आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वह विभिन्न राजनीतिक दलों से समर्थन मांगने और केंद्र पर दबाव बनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में हैं कि वह जातिगत सर्वेक्षण के तेलंगाना मॉडल के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अधिक आरक्षण प्रदान करें ताकि शिक्षा, स्थानीय निकायों, स्वास्थ्य और विकास में उनके लिए आरक्षण की सीमा 42 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सके.

रेड्डी कांग्रेस नेतृत्व और सांसदों को तेलंगाना सरकार द्वारा 2024 से 2025 तक किए गए जातिगत सर्वेक्षण के बारे में अवगत कराने के लिए दिल्ली में हैं. जातिगत सर्वेक्षण के बाद तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया था. रेड्डी ने कहा, ”हम, सरकार और तेलंगाना के सांसदों की ओर से, बृहस्पतिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करेंगे और उन्हें तेलंगाना में हुई जातिगत जनगणना के बारे में जानकारी देंगे.”

उन्होंने कहा, ”हमने यह प्रक्रिया चार फरवरी, 2024 को शुरू की थी और चार फरवरी, 2025 को पूरी की. हमने हर साल चार फरवरी को सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है. हमने सतर्कतापूर्वक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया है और रोजगार तथा स्थानीय निकाय चुनावों में 42 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण प्रदान करने के लिए एक प्रस्ताव और विधेयक पारित किया है.” रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्यपाल के माध्यम से केंद्र को दो विधेयक भेजे हैं, लेकिन केंद्र सरकार पिछले कई महीनों से उन पर कार्रवाई नहीं कर रही है.

उन्होंने कहा कि क्योंकि संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही चल रही हैं, इसलिए वह अपने मुद्दे उठाने के लिए यहां आए हैं. उन्होंने कहा, ”हम राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से लोकसभा और राज्यसभा दोनों में हमारी मदद करने का आग्रह करेंगे. हम अपने सांसदों को तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में भी बताएंगे.” रेड्डी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय और जाति के लिए है, क्योंकि यह 100 वर्षों के बाद आया है और ओबीसी समुदायों के सदस्यों को इस तरह के आरक्षण की आवश्यकता है.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा, ”मजबूरी में भारत सरकार इस जातिगत जनगणना को स्वीकार करने के लिए सहमत हुई है और हम (नरेन्द्र) मोदी सरकार को आगे का रास्ता दिखाएंगे और पथप्रदर्शक के रूप में काम करेंगे.” रेड्डी ने कहा कि वे संसद के बजट सत्र के दौरान दिल्ली आए थे, जंतर-मंतर पर ओबीसी आरक्षण के समर्थन में धरना दिया था और कई दलों और सांसदों से समर्थन मांगा था. उन्होंने कहा, ”हम अब भी उनका समर्थन मांगेंगे.”

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