राष्ट्रवाणी: न्यूज, कवर्धा। शहर में लंगूरों का बढ़ता आतंक अब आम लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। बीते 10 दिनों में शहर के तीन वार्डो में 12 से अधिक लोगों पर लंगूर हमला कर चुके हैं। सबसे अधिक घटनाएं वार्ड क्रमांक 10, 11 और 12 में सामने आई हैं, जहां लोग दहशत के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर बुजुर्गों के घर से बाहर निकलने तक में भय का माहौल है। लगातार हो रहे हमलों ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है और अब नागरिक इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लंगूर मकानों की छतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और दीवारों पर बैठे रहते हैं तथा अचानक राहगीरों पर हमला कर देते हैं। कई लोगों के हाथ, पैर और चेहरे पर गहरे घाव आए हैं। कुछ घायलों को अस्पताल में टांके लगाने पड़े हैं, जबकि संक्रमण की आशंका को देखते हुए चिकित्सकों ने एंटी रैबीज टीके भी लगाए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बंदरों के काटने पर समय पर उपचार नहीं मिलने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि लगातार बढ़ रही घटनाओं ने लोगों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है। प्रभावित वार्डों में रहने वाले लोगों का कहना है कि अब बच्चे अकेले स्कूल जाने से डर रहे हैं। महिलाएं और बुजुर्ग भी आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकल रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों में भी भय बना हुआ है कि यदि चलते समय लंगूर हमला कर दे तो बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो किसी दिन कोई बड़ी जनहानि भी हो सकती है। लगातार शिकायतों के बाद वन विभाग ने बिलासपुर से पहुंची पशु चिकित्सक टीम के साथ संयुक्त अभियान चलाकर तीन लंगूरों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ा था। लोगों को उम्मीद थी कि इसके बाद हालात सामान्य होंगे, लेकिन हमलों का सिलसिला नहीं थमा। इससे नागरिकों में चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब तक आबादी वाले क्षेत्रों में सक्रिय आक्रामक लंगूरों को पूरी तरह नहीं हटाया जाएगा, तब तक खतरा बना रहेगा। वन विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही है। जिन स्थानों से हमलों की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल अमले को भेजा जा रहा है। अब तक तीन लंगूरों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। नागरिकों से अपील की कि लंगूरों को भोजन न दें, उन्हें उकसाने का प्रयास न करें तथा किसी भी घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दें। – निखिल अग्रवाल, कवर्धा वनमंडलाधिकारी ने से चर्चा में बताया कि
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