राष्ट्रवाणी (छत्तीसगढ़ ब्यूरो): नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए शक्तिशाली चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से झारखंड के मौसम में अचानक भारी बदलाव के आसार हैं। मौसम विभाग ने इसके मद्देनजर राज्यभर में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी कर दिया है।
इस तूफान के बाहरी प्रभाव (आउटर बैंड) के कारण झारखंड में 28 से 30 अक्टूबर के दौरान मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और भयंकर वज्रपात की आशंका जताई गई है। संभावित खतरे को देखते हुए राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
- मौसम केंद्र रांची के अनुसार, चक्रवात के असर से राज्य में मौसम का मिजाज तीन चरणों में बिगड़ेगा।
- 30 अक्टूबर को भी पश्चिमी और मध्य झारखंड में इसका असर बना रहेगा, जबकि 31 अक्टूबर से मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।
- प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
मौसम केंद्र रांची के अनुसार, चक्रवात के असर से राज्य में मौसम का मिजाज तीन चरणों में बिगड़ेगा।
27 अक्टूबर से ही गोड्डा, देवघर, दुमका, रांची, धनबाद और बोकारो समेत 16 जिलों में येलो अलर्ट के तहत आसमान में घने बादल छाने और हल्की बारिश की शुरुआत होने की संभावना है। इसके बाद 28 और 29 अक्टूबर को और अधिक गंभीर रूप ले लेगा। इन दो दिनों के लिए राजधानी रांची, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू, गढ़वा, चतरा, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां समेत अधिकांश जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। 30 अक्टूबर को भी पश्चिमी और मध्य झारखंड में इसका असर बना रहेगा, जबकि 31 अक्टूबर से मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है। आपदा की इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने कमर कस ली है।
रांची के उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री सहित विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने नगर निगम, पुलिस, बिजली और स्वास्थ्य विभागों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा कर दिशानिर्देश जारी किए हैं। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए 28 और 29 अक्टूबर को कई प्रभावित जिलों में स्कूलों को बंद रखने का निर्णय स्थानीय समीक्षा के आधार पर लिया जा सकता है।
प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। रांची समेत प्रमुख शहरों के निचले इलाकों, जलजमाव वाले हॉटस्पॉट और बड़े नालों की चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में कच्चे मकानों या झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा सके।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बाधित न हो, इसके लिए प्रमुख मार्गों पर क्रेन और भारी मशीनरी को स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि आंधी से गिरे पेड़ों या खंभों को तुरंत हटाया जा सके।
