राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि,बिलासपुर: छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के एमबीबीएस इंटर्न ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर बुधवार से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण हड़ताल एवं कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। इस संबंध में इंटर्न ने चिकित्सा अधीक्षक को औपचारिक सूचना पत्र सौंपते हुए बताया कि यह निर्णय पूरे छत्तीसगढ़ के एमबीबीएस इंटर्न के संयुक्त आह्वान पर लिया गया है। इंटर्न का कहना है कि वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह केवल 15900 स्टाइपेंड मिलता है, जबकि पड़ोसी राज्य ओडिशा में एमबीबीएस इंटर्न को 44,319 तथा अन्य कई राज्यों में लगभग 30 हजार या उससे अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनका तर्क है कि 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करने के बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय मिल रहा है, इसलिए उनके मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार किया जाना चाहिए। इंटर्न ने बताया कि पिछले कई महीनों से वे इस मांग को लेकर शासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लगातार ज्ञापन सौंप रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री सहित संबंधित अधिकारियों से मुलाकात के दौरान उन्हें जल्द समाधान का आश्वासन भी मिला था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इंटर्न का यह भी कहना है कि स्टाइपेंड वृद्धि का प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है, जिससे उनकी पूरी इंटर्नशिप समाप्त होने की स्थिति बन रही है। लोकतांत्रिक तरीकों से जता चुके हैं विरोध हड़ताल पर जाने से पहले इंटर्न ने दो दिवसीय ब्लैक रिबन बांधकर विरोध प्रदर्शन और शांतिपूर्ण मार्च जैसे लोकतांत्रिक माध्यम अपनाए थे, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद राज्यभर के एमबीबीएस इंटर्न के सामूहिक निर्णय के आधार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का यह कदम उठाया गया है। अपने पत्र में इंटर्न ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना कतई नहीं है, लेकिन कम स्टाइपेंड के चलते वे खुद गंभीर आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि हड़ताल के दौरान अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने पर इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन की होगी। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखते हुए सरकार के साथ रचनात्मक संवाद के लिए हमेशा तैयार हैं और जल्द समाधान की उम्मीद रखते हैं।
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