राष्ट्रवाणी: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने शापूरजी पालोनजी के खिलाफ यूनिटन इंफ्रा की दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की याचिका खारिज कर दी है। NCLT ने शापूरजी पालोनजी के खिलाफ दिवालिया याचिका खारिज की। यूनिटन इंफ्रा ने 4.31 करोड़ रुपये के कर्ज का दावा किया था।
कोविड प्रतिबंध और कानूनी सीमा के कारण याचिका अस्वीकृत हुई। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। टाटा संस में 18 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया नहीं शुरू होगी।
दरअसल, यूनिटन इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड ने एक याचिका दायर करके इस ग्रुप के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की अपील की थी। लेकिन नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने यूनिटन इंफ्रा याचिका को खारिज कर दिया। यूनिटन इंफ्रा ने अपनी याचिका में 4.31 करोड़ रुपये के कथित कर्ज को लेकर दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी।
23 सितंबर के आदेश के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने RKI बिल्डर्स द्वारा कथित कर्ज को यूनिटन (Uniton) को सौंपे जाने के बाद यूनिटन के क्लेम को आगे बढ़ाने के अधिकार को तो स्वीकार किया, लेकिन कई आधारों पर दिवालियापन की याचिका को खारिज कर दिया। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने पाया कि क्लेम का एक बड़ा हिस्सा कोविड-दौर के दिवालियापन से जुड़े प्रतिबंध (insolvency bar) के दायरे में आता था, जबकि बाकी रकम कानूनी सीमा (statutory threshold) से कम थी।
उसने यह भी पाया कि यूनिटन यह साबित नहीं कर पाया कि कर्ज चुकाने का समय आ गया था और उसका भुगतान किया जाना था। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में सड़क की मरम्मत के लिए पब्लिक हेल्थ एंड म्युनिसिपल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHMED) ने नेल्लोर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (NMC) के जरिए टेंडर निकाला था। इस टेंडर को शापूरजी पलोनजी ने जीता।
बात में शापूरजी ग्रुप ने इस प्रोजेक्ट के कुछ हिस्से के लिए RKI बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड को 8.25 करोड़ रुपये में सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया। इसके बाद RKI ने यह काम Uniton Infra को सब-कॉन्ट्रैक्ट कर दिया। Uniton के अनुसार, उसने काम के लिए फंडिंग की और उसे पूरा किया, जबकि RKI ने Shapoorji Pallonji को इनवॉइस भेजे।
15 सितंबर 2020 का 3.41 करोड़ रुपये का इनवॉइस और 15 मई 2021 का 89.60 लाख रुपये का इनवॉइस, जो कुल मिलाकर 4.31 करोड़ रुपये होते हैं। बाद में RKI ने 10 अप्रैल 2022 को एक ‘डेट असाइनमेंट डीड’ (कर्ज हस्तांतरण दस्तावेज) के जरिए यह कथित कर्ज Uniton को सौंप दिया। यूनिटन ने मई 2023 में शापूरजी पलोनजी को 4.31 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए डिमांड नोटिस भेजा।
शापूरजी ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि उनके और यूनिटन के बीच कोई सीधा कॉन्ट्रैक्ट नहीं था और NMC से संबंधित पेमेंट भी नहीं मिला था।

