राष्ट्रवाणी: अभिषेक सेमर, तखतपुर। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा किसी भूमि पर स्थगन आदेश जारी किए जाने के बावजूद तखतपुर उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री किए जाने का मामला सामने आया है। मामला खसरा नंबर 109/33 से जुड़ा है, जहां 22 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा स्थगन आदेश क्रमांक 426 अ,वि,अ – वा 1 – 2026 जारी किए जाने के बाद भी रजिस्ट्री करने और स्वतः नामांतरण करने की जानकारी सामने आई है।
इस मामले ने अब राजस्व और पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि के मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा स्थगन आदेश जारी करते हुए उक्त खसरे के संपूर्ण बटांकन की भूमियों के विक्रय, नामांतरण और निर्माण कार्य पर आगामी आदेश तक रोक लगाई गई थी।
इसके बावजूद यदि उसी भूमि की रजिस्ट्री की गई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्थगन आदेश के बाद पंजीयन कार्यालय में दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की गई। किसी भूमि पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा स्थगन लगाए जाने के बाद संबंधित पटवारी अभिलेख के रिकॉर्ड में इसकी जानकारी दर्ज की जाती है।
पटवारी द्वारा पी-2 के कैफियत कॉलम में भी स्थगन संबंधी उल्लेख किया जाता है। यानी संबंधित भूमि की स्थिति राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होने के बाद उसके विक्रय और अन्य कार्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट रहती है। इसके बावजूद स्थगन आदेश और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कैफियत को दरकिनार कर रजिस्ट्री होने की बात सामने आना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले में सबसे अहम बात यह बताई जा रही है कि संबंधित खसरे की ऑनलाइन वर्तमान स्थिति में भी स्थगन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि रजिस्ट्री से पहले संबंधित भूमि की ऑनलाइन स्थिति की जांच की गई थी या नहीं। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में स्थगन दर्ज था, तो फिर पंजीयन कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के दौरान इस तथ्य पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?
क्या पंजीयन से पहले भूमि की वर्तमान राजस्व स्थिति की ऑनलाइन जांच नहीं की गई? यही सवाल अब तखतपुर उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। मामले में आरोप है कि स्थगन आदेश के बावजूद रजिस्ट्री करने के बाद स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया भी कर दी गई।
जबकि 22 अप्रैल 2026 के स्थगन आदेश में संबंधित खसरे के संपूर्ण बटांकन की भूमियों के विक्रय और नामांतरण पर रोक लगाए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि भूमि पर स्थगन लगने के बावजूद पुराने पी-2 को रजिस्ट्री के दस्तावेजों के साथ संलग्न किया जा रहा है।
आरोप है कि स्थगन के बाद की वर्तमान स्थिति को दरकिनार करते हुए पुराने राजस्व दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का सिलसिला जारी है। यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है कि रजिस्ट्री के समय नवीनतम पी-2 और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच की गई थी या नहीं। यह मामला सामने आने के बाद अब तखतपुर अनुभाग के तखतपुर और सकरी तहसील क्षेत्र में स्थगन के बावजूद हुई रजिस्ट्रियों की जांच की मांग उठने लगी है।
दावा किया जा रहा है कि ऐसे दर्जनों मामले हो सकते हैं, जिनमें राजस्व विभाग द्वारा भूमि पर स्थगन आदेश जारी किए जाने के बावजूद पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। यदि इन मामलों की जांच की जाए और स्थगन आदेश की तारीख, पी-2 की प्रविष्टि, रजिस्ट्री की तारीख और नामांतरण की तारीख का मिलान किया जाए तो पूरी स्थिति सामने आ सकती है।
एक ओर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा भूमि पर स्थगन आदेश लगाया जाता है, वहीं दूसरी ओर उसी भूमि की रजिस्ट्री हो जाती है। ऐसे में सवाल सिर्फ एक रजिस्ट्री का नहीं बल्कि राजस्व और पंजीयन व्यवस्था के बीच समन्वय और आदेशों के पालन का भी है। खसरा नंबर 109/33 का मामला सामने आने के बाद अब जरूरत इस बात की है कि तखतपुर और सकरी क्षेत्र में उन सभी जमीनों की जांच की जाए, जिन पर राजस्व न्यायालय अथवा सक्षम अधिकारी द्वारा स्थगन लगाया गया है।जांच में यह देखा जा सकता है कि स्थगन आदेश कब जारी हुआ?
पी-2 में स्थगन कब दर्ज हुआ? ऑनलाइन रिकॉर्ड में स्थिति कब अपडेट हुई? रजिस्ट्री किस तारीख को हुई?
रजिस्ट्री के समय कौन-सा पी-2 प्रस्तुत किया गया? नामांतरण कब किया गया? पंजीयन से पहले वर्तमान रिकॉर्ड की ऑनलाइन जांच रजिस्ट्रार के द्वारा की गई या नहीं ?
इन सभी बिंदुओं की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि कहीं पुराने दस्तावेजों के आधार पर स्थगन आदेश को दरकिनार कर पंजीयन तो नहीं किया गया। तखतपुर उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी सवाल उठने की बात सामने आ रही है। अब स्थगन आदेश के बावजूद रजिस्ट्री का यह मामला सामने आने के बाद निगाहें उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
सवाल उठ रहा कि क्या उच्च अधिकारी पूरे मामले की जांच कराएंगे? क्या स्थगन आदेश के बावजूद हुई रजिस्ट्री की जिम्मेदारी तय होगी?क्या तखतपुर और सकरी क्षेत्र की ऐसी सभी रजिस्ट्रियों की जांच होगी? या फिर जांच के नाम पर मामला चलता रहेगा और रजिस्ट्री कार्यालय में पुरानी व्यवस्था इसी तरह जारी रहेगी?
अब देखना होगा कि स्थगन आदेश के बावजूद हुई कथित रजिस्ट्री के इस मामले में उच्च अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और जांच के बाद क्या सच्चाई सामने आती है या जांच के नाम पर खाना पूर्ति करते हुवे मामले को चलता करेंगे। इस मामले में उप पंजीयक आशीष तिवारी से नियम विरुद्ध पंजीयन के मामले में जब पूछा गया तो उप पंजीयक जवाब देने से बचते रहे और मामले में टालमटोल करते रहे।

