राष्ट्रवाणी: Bandhan Bank Success Story: बंधन बैंक की सफलता की कहानी चंद्रशेखर घोष ( Chandra Shekhar Ghosh) के ₹2 लाख के …और पढ़ें बंधन बैंक की प्रेरणादायक कहानी: ₹2 लाख से ₹27,000 करोड़ का सफर और महिला सशक्तिकरण जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| बंधन बैंक चर्चा में हैं।
वजह है- अबू धाबी की इन्वेस्टमेंट कंपनी, जो बंधन बैंक की प्रमोटर बंधन फाइनेंशियल सर्विसेज में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी कर रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं- बंधन बैंक (Bandhan Bank success story) को शुरू करने के पीछे किसका दिमाग था? बांग्लादेश से उपजा आइडिया क्या था, जो पहले NGO बना फिर और धीरे-धीरे बैंक का आकार लेता गया?
आखिर कैसे उधारी के 2 लाख रुपए से 27 हजार करोड़ का बैंक बन गया? और चौंकाने वाली बात- कैसे महिलाएं बनी इस बैंक की सबसे बड़ी ग्राहक? चलिए इस खबर में जानते हैं बंधन बैंक के बनने की पूरी कहानी।
बंधन बैंक की शुरुआत एक ऐसे विचार से हुई थी, जिसमें गरीब महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने की ताकत देखी गई। बंधन बैंक के संस्थापक चंद्रशेखर घोष (Chandra Shekhar Ghosh biography) ने महसूस किया कि छोटे कारोबारियों को कारोबार बढ़ाने के लिए अक्सर साहूकारों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है।
इसी समस्या ने बंधन बैंक की नींव रखी। चंद्रशेखर घोष ने 1985 में बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी से सांख्यिकी में मास्टर डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास के लिए काम करने वाली संस्था BRAC में काम किया।
वहां उन्होंने देखा कि छोटी आर्थिक मदद भी महिलाओं की जिंदगी बदल सकती है। भारत लौटने के बाद उन्होंने सामाजिक संस्थाओं के साथ काम किया। इस दौरान उन्हें ग्रामीण इलाकों में छोटे कर्ज की जरूरत और साहूकारों पर लोगों की निर्भरता करीब से समझ आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई साहूकार छोटे कर्ज पर 200% से 300% तक ब्याज वसूलते थे। साल 2000 में नौकरी छोड़ने के बाद घोष ने 2001 में बंधन बैंक की शुरुआत की। उस समय उनके पास करीब 2 लाख रुपए थे, जिनमें से ज्यादातर रकम रिश्तेदारों से उधार ली गई थी।
शुरुआत में केवल तीन कर्मचारी थे। पश्चिम बंगाल के बागनान इलाके से छोटे कर्ज देने का काम शुरू हुआ। शुरुआती दौर में महिलाओं को कर्ज लेने के लिए राजी करना भी आसान नहीं था।
उन्हें भरोसा दिलाना पड़ता था कि यह पैसा कारोबार बढ़ाने और परिवार की आमदनी सुधारने में मदद कर सकता है। बंधन का नाम भी इसी सोच से जुड़ा है। इसका मतलब है- ‘जुड़ाव’ या ‘रिश्ता’।
घोष का मकसद भी यही था कि गरीब महिलाओं को कर्ज देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। शुरुआत में गांव की महिलाएं उन पर भरोसा नहीं करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह मॉडल आगे बढ़ने लगा। आज बंधन बैंक की सबसे ज्यादा ग्राहक ही महिलाएं हैं।
बंधन बैंक ने अप्रैल 2001 में एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में काम शुरू किया। अप्रैल 2006 में इसने NBFC के रूप में विस्तार किया। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक से बैंकिंग का लाइसेंस मिलने पर 23 अगस्त 2015 को बंधन बैंक ने औपचारिक रूप से काम शुरू किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंक का उद्घाटन किया था। पहले ही दिन बैंक ने 501 शाखाओं, 50 एटीएम और 24 राज्यों में मौजूदगी के साथ शुरुआत की। इसके पास 1.43 करोड़ खाते और करीब 10,448 करोड़ रुपए के कर्ज थे।
बंधन बैंक का मार्केट 27,261 करोड़ रुपए है। बैंक के देशभर में 6400 से ज्यादा आउटलेट्स और 435 से ज्यादा एटीएम हैं। बैंक में करीब 75000 कर्मचारी काम करते हैं।
बता दें कि कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 37.54% है। बैंक में फॉरेन इन्वेस्टर्स (FIIs) की हिस्सेदारी 18.64%, डोमेस्टिक निवेशकों (DIIs) की हिस्सेदारी 27.47% और सरकार की हिस्सेदारी 0.07% है।

