राष्ट्रवाणी (छत्तीसगढ़ ब्यूरो): नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. यह याचिकाएं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा दायर की गई हैं. प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागछी की पीठ ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांगते हुए इन याचिकाओं को विभिन्न राज्यों में SIR की वैधता को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ टैग कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आदेश देते हुए कहा, “हम नोटिस जारी कर रहे हैं और इसे पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ रहे हैं. कोई भारत निर्वाचन आयोग की ओर से नोटिस स्वीकार करेगा. अन्यथा, उन्हें तामील कराएं.” विशेष रूप से, अदालत ने कहा कि वह याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण मांगेगी. हालांकि, पीठ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस याचिकाकर्ता का उल्लेख कर रही थी. अदालत ने टिप्पणी की, “नोटिस जारी करें. लेकिन उससे पहले एक आपत्ति है. हम अगली सुनवाई की तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे. नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि हम किसी बात की निंदा कर रहे हैं. हम नोटिस जारी कर रहे हैं. लेकिन याचिकाकर्ताओं में से एक के बारे में, हम निश्चित रूप से इस मुद्दे पर विचार करेंगे. याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से नोटिस अनंतिम आधार पर स्वीकार किया जाएगा, जो उनके द्वारा अपने आचरण को स्पष्ट करने के अधीन होगा.” इस मामले में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता एम.ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद बशीर प्रमुख याचिकाकर्ता हैं. यह घटनाक्रम दिल्ली में SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है. दरअसल, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए थे, जिसमें गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गया था कि ज्ञानेश कुमार ने दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद SIR से जुड़े कई फैसले एकतरफा लिए थे. दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला और गरमा गया है. इसके बाद सर्वोच्च अदालत में कई अन्य याचिकाएं भी दायर की गई हैं, जिनमें गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गया है कि पुलिस ने वकीलों और पत्रकारों को भी हिरासत में लेकर उनके पेशेवर कर्तव्यों में बाधा पहुंचाई. इससे पहले, राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था और गड़बड़ियों के खिलाफ यह याचिका दाखिल की थी.
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