राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): प्रतिनिधि, रायपुर। बिजली उत्पादन में अग्रणी और ‘पावर सरप्लस’ राज्य का दर्जा रखने वाले छत्तीसगढ़ में इन दिनों मांग और आपूर्ति का असंतुलन उद्योगों के पहियों को थाम रहा है। प्रदेश में भीषण उमस, कृषि पंपों के निरंतर संचालन और एयर कंडीशनरों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की खपत ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।
राज्य में पीक ऑवर्स में मांग 6300 मेगावाट के पार जा चुकी है। बिजली वितरण कंपनी को दूसरे राज्यों और पावर एक्सचेंज से 10 रुपये प्रति यूनिट तक की महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसके बावजूद रायपुर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों—उरला, सिलतरा, भनपुरी और सरोरा में अघोषित बिजली कटौती का दौर जारी है, जिससे कल-कारखानों का संचालन प्रभावित हो गया है।
विद्युत विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उमस भरी गर्मी के बीच रविवार को पीक आवर्स के दौरान मांग 6300 मेगावाट पार दर्ज की गई। स्थानीय ताप विद्युत संयंत्रों और जल विद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली मांग के आगे आधी साबित हो रही है। इस अंतर को पाटने के लिए पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश से 200 मेगावाट बिजली ली गई थी।
इसके अतिरिक्त हरियाणा तथा इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से प्रतिदिन 100 से लेकर 700 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली खरीदी जा रही है। एक्सचेंज में बिजली की दरें 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच चुकी हैं। भारी खर्च के बाद भी मांग का दबाव इतना अधिक है कि औद्योगिक फीडरों पर लोड शेडिंग करनी पड़ रही है।
अघोषित कटौती की सबसे भीषण मार प्लास्टिक निर्माण इकाइयों पर पड़ी है। छत्तीसगढ़ फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री के अध्यक्ष शंकर बजाज ने बताया कि पिछले दो महीनों से जारी अनिश्चित बिजली आपूर्ति के चलते प्लास्टिक उद्योगों का उत्पादन सिमटकर मात्र 25 प्रतिशत रह गया है। इस उद्योग की स्वचालित मशीनों को कार्यशील तापमान तक लाने में ही 3 से 4 घंटे हीटिंग की आवश्यकता होती है।
लेकिन बार-बार बिजली गुल होने से पूरा कच्चा माल खराब हो जाता है और चक्र बाधित होता है। शाम 6:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक लगातार हो रही कटौती के कारण अधिकांश कारखानों में रात की पाली पूरी तरह बंद हो चुकी है। स्टील रोलिंग मिलों और वायर ड्राइंग इकाइयों की स्थिति भी बेहद गंभीर है।
छत्तीसगढ़ स्टील री-रोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी के अनुसार, 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाली इकाई अगर 20 प्रतिशत उत्पादन गंवाती है, तो उसे 25 दिनों में करीब 500 टन तैयार माल का नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, छत्तीसगढ़ वायर ड्राइंग इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन लिम्बानी का कहना है कि बार-बार ट्रिपिंग से लेबर आइडल बैठती है, उत्पादन लागत बढ़ती है और समय पर आपूर्ति न होने से बाजार में औद्योगिक साख प्रभावित हो रही है।
औद्योगिक संकट के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने कहा कि प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं और उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण व निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग हरसंभव कदम उठा रहा है। बढ़ती मांग का दैनिक आकलन कर पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है, ताकि औद्योगिक इकाइयों को जल्द राहत मिल सके।

