राष्ट्रवाणी: लता मंगेशकर ने फिल्म 52 साल पहले एक ऐसा सदाबहार गीत गाया था जो आज भी श्रोताओं को भावुक कर …और पढ़ें फिल्म शोर में जया भादुड़ी ने निभाया है रानी का रोल (यूट्यूब स्क्रीनग्रैब) फिल्म ‘शोर’ का यह गीत 1972 में आया था गाने में वायलिन की धुन आज भी मशहूर है एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली।
लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने अपने सात दशक के लंबे करियर में बॉलीवुड के लिए कई बेहतरीन गाने गाए हैं। इनमें हर मिजाज, हर भावना और हर शैली के गाने मौजूद हैं। इसी के बाद उन्हें सिनेमा में स्वर कोकिला की ख्याति मिली।
अपने करियर में लता दीदी ने अलग-अलग भाषाओं में लगभग 30 हजार गाने गाए। आज आपको उनके एक ऐसे ही बेहद प्रसिद्ध और सदाबहार गाने के बारे में बताएंगे। हम बात कर रहे हैं साल 1972 में आई फिल्म शोर (Shor) के गाने प्यार का नगमा की (Ek Pyaar Ka Naghma Ki)।
इसे लिजेंड्री सिंगर मुकेश और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से सजाया था। इसका संगीत दिया था लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने और भावुक बोल लिखे थे संतोष आनंद ने। यह गाना जिंदगी की सच्चाई, प्यार और इंसानी रिश्तों की गहराई को बहुत ही खूबसूरती से बयान करता है।
इस गाने की सबसे दिलचस्प बात इसकी शुरुआत में बजने वाला वायलिन है। गाने के शुरू होने से पहले वायलिन की जो लंबी धुन सुनाई देती है उसे आज भी सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ये ऐसा एक्सपेरिमेंट था जिसे शायद ही आजतक बॉलीवुड में कोई दोबारा क्रिएट कर पाया हो।
मनोज कुमार ने ही इस फिल्म का निर्देशन किया था। कई जगह ऐसी भी चर्चा है कि गीतकार संतोष आनंद ने मूल रूप से इस गाने के लिए जितने अंतरे लिखे थे, वे सभी फिल्म में इस्तेमाल नहीं हुए। इस गाने के दो ऐसे अंतरे थे जिन्हें कभी रिकॉर्ड ही नहीं किया गया।
संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने गाने की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसे छोटा करने के लिए समेट दिया। फिल्म ‘शोर’ की कहानी एक गरीब पिता (शंकर) के संघर्ष, उसके अटूट प्यार और विडंबनापूर्ण त्रासदी पर आधारित है।

