राष्ट्रवाणी (बस्तर ब्यूरो): बीजापुर, 31 अक्टूबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित इंद्रावती बाघ अभयारण्य में तीन दशक बाद एक नवंबर से जंगल सफारी की शुरूआत की जाएगी। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बस्तर क्षेत्र के बीजापुर जिले में शांति, विकास और पर्यटन की नयी संभावनाओं के बीच इंद्रावती बाघ अभयारण्य में लगभग तीन दशक बाद जंगल सफारी की शुरुआत होने जा रही है।
उन्होंने कहा कि पर्यटक अब जंगल सफारी के माध्यम से वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार यह पहल जिले में पर्यटन विकास, वन्यजीव संरक्षण एवं स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 को वामपंथी उग्रवाद खत्म होने की घोषणा के बाद बीजापुर जिले में शांति व विकास की नयी संभावनाएं सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि इसी क्रम में जंगल सफारी की शुरुआत से जिले की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को नयी पहचान मिलने के साथ स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि इंद्रावती बाघ अभयारण्य क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का चौथा सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है। अधिकारियों मुताबिक वर्ष 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया तथा वर्ष 1982-83 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया।
उन्होंने कहा कि अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर तथा 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। उन्होंने कहा कि यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल, ऊदबिलाव सहित भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसे दुर्लभ वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि प्रथम चरण में उल्लूर गांव से शुरू होकर लगभग नौ किलोमीटर का मार्ग जंगल सफारी के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने का कि पर्यटकों की सुविधा के लिए चार जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं तथा सफारी का शुल्क दो हजार रुपये निर्धारित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में पर्यटकों की संख्या एवं पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के अनुरूप वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि जंगल सफारी के दौरान प्रशिक्षित स्थानीय गाइड पर्यटकों को वन्यजीवों, जैव विविधता तथा प्राकृतिक विशेषताओं की जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए छह स्थानीय युवाओं को गाइड और सफारी वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक सफारी गेट के समीप पारंपरिक मिट्टी के घरों की थीम पर जलपान गृह की व्यवस्था भी की गई है, जहां पर्यटक ग्रामीण परिवेश में स्थानीय व्यंजनों एवं जलपान का आनंद ले सकेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि जंगल सफारी के संचालन से स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए गाइड, वाहन चालक, होमस्टे, खान-पान एवं पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन, जनजातीय कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा।
Web Title: छत्तीसगढ़ के इंद्रावती बाघ अभयारण्य में तीन दशक बाद एक नवंबर से शुरू होगी जंगल सफारी छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का आज से होगा भव्य आगाज, दिखेगी लोकसंस्कृति की झलक, कौन-कौन सिंगर देगा प्रस्तुति पृथक राज्य का जश्न.. ‘महतारी’ पर प्रश्न! राज्योत्सव से पहले सियासी बखेड़ा, खुशी के अवसर पर उपेक्षा के आरोप क्यों?
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