नयी दिल्ली. आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे होने के अवसर पर देशभर में स्मृति कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक समारोह में शामिल होंगे और ‘लोकतंत्र जिंदाबाद यात्रा’ को हरी झंडी दिखाएंगे.
संस्कृति मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि यह यात्रा संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक अधिकारों और आपातकाल से मिली सीख के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए देश भर में गुजरेगी.
मंत्रालय, दिल्ली सरकार के सहयोग से, बुधवार को यहां त्यागराज स्टेडियम में ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाएगा, जो 25 जून 1975 को भारत में आपातकाल लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है. मंत्रालय के एक बयान में कहा गया, ”यह पवित्र अवसर लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के महत्व की याद दिलाएगा.” आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास में ”सबसे काले अध्यायों में से एक” बताते हुए मंत्रालय ने कहा, ”मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को खामोश कर दिया गया.”
मंत्रालय ने कहा, ”वर्ष 2024 में, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में अधिसूचित किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस महत्वपूर्ण अवधि को भुलाया नहीं जाए और लोकतंत्र की पवित्रता को निरंतर बनाए रखा जाए.” केंद्रीय गृह मंत्री शाह त्यागराज स्टेडियम में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे और ‘लोकतंत्र जिंदाबाद’ यात्रा को हरी झंडी भी दिखाएंगे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे. दिल्ली में मुख्य कार्यक्रम के अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संबंधित मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और उपराज्यपालों की अगुवाई में स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
समाजवादी, द्रमुक अब उस पार्टी के साथ हैं जिसने आपातकाल के जरिए ‘लोकतंत्र की हत्या’ की: शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस से हाथ मिलाने वाले द्रमुक, समाजवादी नेताओं और अन्य पर निशाना साधते हुए कहा कि वे एक ऐसी पार्टी के साथ बैठे हैं जिसने आपातकाल लगाकर ”लोकतंत्र की हत्या” की. ‘आपातकाल के 50 वर्ष’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने यह भी कहा कि 25 जून -जिस दिन आपातकाल लगाया गया था – हर किसी को याद दिलाता है कि कांग्रेस सत्ता के लिए किस हद तक जा सकती है.
उन्होंने कहा कि 1975 के आपातकाल को भले ही 50 साल हो गए हों, लेकिन कांग्रेस के ”अन्याय, अत्याचार और तानाशाही” की यादें अभी भी सभी के दिमाग में ताजा हैं. गृह मंत्री ने कहा कि आपातकाल लागू होने के बाद देश भर में 1.1 लाख लोगों – विपक्षी नेताओं, छात्र कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और संपादकों को गिरफ्तार किया गया.
उन्होंने कहा कि इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गुजरात और तमिलनाडु में गैर-कांग्रेसी सरकारों को बर्खास्त कर दिया था. शाह ने कहा, ”दुर्भाग्य से, आपातकाल का दंश झेलने वाले कई लोग अब कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ गए हैं.” शाह ने कहा, ”मैं कांग्रेस के बजाय द्रमुक, समाजवादी और अन्य पार्टियों से पूछना चाहता हूं कि आपको लोकतंत्र के बारे में सवाल पूछने का क्या अधिकार है, जब आपने उस पार्टी से हाथ मिला लिया है जिसने देश में लोकतंत्र की हत्या की है.”
शाह ने कहा कि भारत तानाशाही को स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि यह देश लोकतंत्र की जननी है. उन्होंने कहा, ”अत्याचारी के ईद-गिर्द रहने वाले एक छोटे से समूह को छोड़कर किसी को भी आपातकाल पसंद नहीं था. यही कारण है कि जब आपातकाल हटा तो भारत के लोगों ने देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार (केंद्र में) चुनी.” अपना निजी अनुभव साझा करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जब आपातकाल लगाया गया था तब वह सिर्फ 11 वर्ष के थे और गुजरात में उनके गांव के 184 लोगों को गिरफ्तार कर साबरमती जेल में रखा गया था.
