नयी दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि जातिगत जनगणना के साथ ही यह सुनिश्चित होना चाहिए कि आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा खत्म हो तथा निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाए।

पार्टी के ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विभागों के प्रमुखों ने संवाददाताओं से बातचीत में यह दावा भी किया कि कांग्रेस और राहुल गांधी के दबाव में सरकार जातिगत जनगणना के लिए तैयार हुई है।

कांग्रेस के ओबीसी विभाग के अध्यक्ष अनिल जयंिहद ने कहा, ‘‘जब मनमोहन ंिसह जी प्रधानमंत्री और अर्जुन ंिसह जी शिक्षा मंत्री थे, तब हमारे संविधान में 93वां संशोधन किया गया था और उसमें अनुच्छेद 15(5) के तहत दलितों, आदिवासियों और समाज के सामाजिक और शैक्षणिक रुप से पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का प्रावधान लागू हुआ।’’

उन्होंने कहा कि उस समय सरकारी शिक्षण संस्थानों में ये आरक्षण लागू हो गया, लेकिन निजी संस्थानों के लोग इसे अदालत में ले गए, जहां ये मामला आगे बढ़ता चला गया। जयंिहद ने दावा किया कि मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में इसको लेकर कोई कदम नहीं उठाया।

उन्होंने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस के अनुसूचित जनजाति विभाग के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने कहा, ‘‘पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते थे कि जाति की बात करना पाप है और यह ‘अर्बन नक्सल’ की सोच है, लेकिन अब यू-टर्न ले लिया, क्योंकि इन्हें पता चल गया है कि यह बहुत बड़ी क्रांति है।’’

उन्होंने सवाल किया कि जातिगत जनगणना के लिए भाजपा सरकार की रूपरेखा, समयसीमा और प्रक्रिया क्या होगी? भूरिया ने कहा, ‘‘सरकार और प्रधानमंत्री से मांग है कि हमें जातिगत जनगणना पर ‘हेडलाइन’ नहीं चाहिए। हमें जातिगत जनगणना की ‘टाइमलाइन और डेडलाइन’ चाहिए।’’

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रमुख राजेश लिलोठिया ने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी चाहती है कि आरक्षण में 50 प्रतिशत की सीमा खत्म होनी चाहिए, क्योंकि यह सामाजिक न्याय में सबसे बड़ी रुकावट है।’’ उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 प्रतिशत के आरक्षण से साफ हो गया है कि 50 प्रतिशत की सीमा को भी पार किया जा सकता है।

लिलोठिया ने कहा, ‘‘अगर भाजपा सामान्य वर्ग के लिए ये कर सकती है, तो वंचितों-शोषितों के लिए क्यों नहीं कर सकती?’’ उन्होंने कहा कि सरकार को जातिगत जनगणना की समय-सीमा बतानी चाहिए।

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version