मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सेबी की पूर्व अध्यक्ष माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और विनियामक उल्लंघन के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के विशेष अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक की अवधि बढ़ा दी है।

उच्च न्यायालय ने पिछले महीने विशेष अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा था कि यह आदेश यंत्रवत पारित किया गया था और इसमें आरोपी की कोई विशेष भूमिका नहीं बताई गई थी। न्यायमूर्ति शिवकुमार डिगे ने मंगलवार को कहा कि मामले में मूल शिकायतकर्ता ने हलफनामा दायर किया है और बुच तथा अन्य को इसे पढ़ने के लिए समय दिया है।

न्यायमूर्ति डिगे ने कहा, ह्लपहले दी गई अंतरिम राहत अगले आदेश तक जारी रहेगी।ह्व उन्होंने मामले की सुनवाई की अगली तारीख सात मई तय की है। पिछले महीने बुच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के तीन वर्तमान पूर्णकालिक निदेशक अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय, ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (बीएसई) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदररामन राममूर्ति और बीएसई के पूर्व अध्यक्ष और जनहित निदेशक प्रमोद अग्रवाल ने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था।

याचिकाओं में विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया था जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को 1994 में बीएसई में एक कंपनी को सूचीबद्ध करते समय धोखाधड़ी के कुछ आरोपों के संबंध में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

याचिकाओं में दावा किया गया था कि विशेष अदालत का आदेश स्पष्ट रूप से गलत, साफ तौर से अवैध और अधिकार क्षेत्र के परे जाकर दिया गया है। विशेष अदालत द्वारा यह आदेश पत्रकार सपन श्रीवास्तव द्वारा दायर एक शिकायत पर पारित किया गया था। याचिका में आरोपियों द्वारा बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, नियामक उल्लंघन और भ्रष्टाचार से जुड़े कथित अपराधों की जांच का अनुरोध किया गया था।
विशेष एसीबी अदालत के न्यायाधीश एस.ई. बांगर ने एक मार्च के अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया विनियमन संबंधी चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसके लिए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

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