नयी दिल्ली. कांग्रेस ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तारीफ किए जाने का हवाला देते हुए बुधवार को दावा किया कि अमेरिका एवं पाकिस्तान के बीच की यह दोस्ती भारत के लिए राष्ट्रीय चिंता का विषय है, लेकिन इस पर ”मोदी सरकार की चुप्पी” परेशान करने वाली है.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान दुनिया भर में बेनकाब और बदनाम हो गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले कुछ महीनों में कई बार मुनीर की तारीफ की है और 60 से अधिक बार यह दावा भी किया कि उन्होंने इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव रुकवाया था. हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) की तरफ से संपर्क किए जाने के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर विचार किया गया था.

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”ऐसा लगता है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रति राष्ट्रपति ट्रंप के आकर्षण का कोई अंत नहीं है, जिनकी भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से वीभत्स टिप्पणियों ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान द्वारा कराए गए आतंकवादी हमले की भूमिका तैयार की थी.”

उन्होंने कहा, ” राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 जून, 2025 को व्हाइट हाउस में दोपहर के भोज के लिए फील्ड मार्शल की मेजबानी की. फिर राष्ट्रपति ट्रंप ने एक अक्टूबर, 2025 को व्हाइट हाउस में फील्ड मार्शल से दूसरी बार मुलाकात की, जब मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति को दुर्लभ धातुओं वाला एक बॉक्स भेंट किया था. फिर ट्रंप ने 13 अक्टूबर, 2025 को मिस्र में मुनीर को ”मेरा पसंदीदा फील्ड मार्शल” कहा. 29 अक्टूबर को राष्ट्रपति ने मुनीर की ”महान सेनानी” के रूप में प्रशंसा की.” उनके अनुसार, बीते 22 दिसंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर मुनीर की प्रशंसा करते हुए उन्हें ” बहुत सम्मानित जनरल” कहा.

रमेश ने कहा, ”अमेरिका और पाकिस्तान के बीच यह मित्रता भारत के लिए बहुत चिंताजनक है. यह आम तौर पर पाकिस्तान को और विशेष रूप से मुनीर को एक तरह से क्लीन चिट प्रदान करता है, जबकि इसके सबूत मौजूद हैं कि मुनीर ने पहलगाम आतंकवादी हमले में न सिर्फ सहयोग किया बल्कि उसे करवाया.” उन्होंने दावा किया कि यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है और इस पर मोदी सरकार की चुप्पी परेशान करने वाली है. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘याद कीजिए कि वर्ष 2008 के मुंबई हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान पूरी तरह बेनक.ाब और बदनाम हुआ था. उसे आज की तरह सराहा और महिमामंडित नहीं किया गया था.”

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