नयी दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि विदेश मंत्रालय की ओर से ‘धोखाधड़ी की स्पष्ट जानकारी’ प्रदान किये जाने के बावजूद अनिवासी भारतीय (एनआरआई) कोटे के तहत कुछ निजी चिकित्सा कॉलेजों में अयोग्य अ्भ्यियथयों के प्रवेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल और ओडिशा की सरकारों ने कोई कार्रवाई नहीं की. संघीय जांच एजेंसी ने कहा कि उसने इस मामले में अतीत में तलाशी के दौरान ‘आपत्तिजनक’ सबूत जब्त किए हैं.

ईडी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के एक निजी कॉलेज की 6.42 करोड़ रुपये की सावधि जमा को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है.
इसने पहले इन कथित अनियमितताओं में शामिल कुछ कॉलेजों और व्यक्तियों की 12.33 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी.
ईडी के मुताबिक, जांच में पाया गया कि इन राज्यों में एमबीबीएस, एमडी और एमएस पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले कुछ निजी चिकित्सा कॉलेजों के प्रबंधन ने अ्भ्यियथयों के लिए ‘फर्जी’ कागजात बनाने के लिए एजेंटों के साथ मिलीभगत की जैसे कि एनआरआई संबंधी दूतावास के दस्तावेज और परिवार का ब्योरा.

”ये निजी चिकित्सा कॉलेज फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए एजेंटों को पैसे दे रहे थे. एजेंटों ने पैसे देकर किसी अन्य एनआरआई से संपर्क किया और उनके प्रमाण-पत्र प्राप्त किए और इनका इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया. इसके बाद जाली दस्तावेजों के आधार पर इन एनआरआई को छात्रों के प्रायोजक के रूप में पेश किया.” एजेंसी ने कहा, ”कुछ मामलों में एजेंटों और मेडिकल कॉलेजों ने दो से तीन अलग-अलग और एक-दूसरे असंबंधित अ्भ्यियथयों के लिए एक ही तरह के एनआरआई प्रायोजक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया.” ईडी ने कहा कि इस अवैध कृत्य के बदले बहुत अधिक राशि का भुगतान कमीशन के रूप में किया गया.

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