राष्ट्रवाणी: बासतार नेवस उपदाते : जगदलपुर. बस्तर दशहरा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि गांवों और परंपराओं से जुड़ी जिम्मेदारियों का जीवंत उदाहरण है. 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक पर्व की पहली रस्म के लिए बिलोरी गांव के ग्रामीणों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई. ग्रामीण माचकोट के जंगल से साल की लकड़ी लेकर मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचे. इसी लकड़ी से दशहरा रथ निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक औजार तैयार किए जाएंगे. खास बात यह है कि लकड़ी का चयन भी आधुनिक तरीके से नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा से किया गया. ग्रामीणों ने पहले साल के पेड़ का चयन किया और फिर पूजा-पाठ के बाद उसे काटा. परंपरा के मुताबिक वही पेड़ चुना जाता है जिसे ग्रामीण अपने हाथों से घेर सकें. इसके बाद करीब चार फीट मोटाई का ठुरलु खोटला तैयार किया गया. अब यह लकड़ी मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने पहुंच चुकी है. हरियाली अमावस्या के दिन मांझी-चालकी, पुजारी और ग्रामीणों की मौजूदगी में पाटजात्रा पूजा विधान होगा. यानी दशहरा शुरू होने से पहले ही बस्तर के गांव अपनी भूमिका निभाना शुरू कर चुके हैं. सदियों पुरानी यह व्यवस्था आज भी उसी श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रही है. यही परंपरा बस्तर दशहरा को देश के दूसरे पर्वों से अलग पहचान देती है. दंतेवाड़ा. किरंदुल में सड़क सुरक्षा और नशा मुक्ति का संदेश अब बच्चों की आवाज में सामने आया है. पुलिस और शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के संयुक्त आयोजन में प्रतियोगिताएं कराई गईं. नशा मुक्ति विषय पर निबंध प्रतियोगिता में 38 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. वहीं यातायात जागरूकता और सड़क सुरक्षा पर चित्रकला प्रतियोगिता में 40 छात्र शामिल हुए. बच्चों ने अपनी सोच को निबंध और चित्रों के जरिए सामने रखा. उच्चतर माध्यमिक वर्ग की निबंध प्रतियोगिता में शशिकला ने पहला स्थान हासिल किया. माध्यमिक वर्ग में रवि कड़ती प्रथम रहे. चित्रकला प्रतियोगिता में कावेरी और मुकेश बारसे ने अपने-अपने वर्ग में बाजी मारी. कार्यक्रम के अंत में विजेता विद्यार्थियों के साथ सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया. पुलिस ने बच्चों को नशे से दूर रहने और यातायात नियमों का पालन करने की समझाइश दी. दरअसल सड़क सुरक्षा का संदेश सिर्फ चालकों तक सीमित नहीं है. बच्चों के जरिए यह संदेश घर और समाज तक पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है. किरंदुल में आयोजित यह कार्यक्रम जागरूकता को नई पीढ़ी से जोड़ने की एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है. नारायणपुर. जिला अस्पताल में एक मासूम बच्ची जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी. अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची बेहोश थी और उसकी हालत बेहद गंभीर बताई गई. जांच में सरेब्रल मलेरिया की पुष्टि हुई, जबकि प्लेटलेट्स की संख्या सिर्फ 9 हजार रह गई थी. गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए इलाज शुरू किया. बच्ची को आईसीयू में भर्ती कर लगातार निगरानी में रखा गया. रात में ही उसके लिए फ्रेश ब्लड की व्यवस्था की गई और ट्रांसफ्यूजन कराया गया. इस दौरान निहाल तिवारी ने रक्तदान कर बच्ची की मदद की. सरेब्रल मलेरिया के इलाज के लिए क्विनीन इंजेक्शन भी शुरू किया गया. लगातार उपचार और निगरानी के बाद बच्ची की हालत धीरे-धीरे सुधरने लगी. प्लेटलेट्स बढ़े और कई दिनों के इलाज के बाद उसे होश भी आ गया. डॉक्टरों के मुताबिक सरेब्रल मलेरिया गंभीर बीमारी है और इसमें इलाज में देरी खतरनाक हो सकती है. तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या बेहोशी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह मामला एक बार फिर बताता है कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में समय पर अस्पताल पहुंचना कितना जरूरी है. नारायणपुर. अबूझमाड़ की पहचान अब सिर्फ दुर्गम इलाकों और कठिन जीवन परिस्थितियों तक सीमित नहीं रह रही है. विशेष पिछड़ी जनजाति अबूझमाड़िया परिवारों के जीवन में पक्के घर का सपना जमीन पर उतर रहा है. प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत पात्र परिवारों का सर्वे किया जा रहा है. जिले में अब तक 4892 अबूझमाड़िया परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है. इनमें से 2390 परिवारों के आवास स्वीकृत किए गए हैं. वहीं स्वीकृति के बाद 315 आवासों का निर्माण पूरा भी हो चुका है. यानी जिन परिवारों के लिए पक्का मकान कभी दूर का सपना था, वहां अब घर तैयार हो रहे हैं. अबूझमाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सर्वे और निर्माण की प्रक्रिया अपने आप में बड़ी चुनौती है. इसके बावजूद प्रशासन पात्र परिवारों तक योजना पहुंचाने का दावा कर रहा है. सर्वे से छूटे परिवारों की पहचान का काम भी लगातार जारी है. इसका मकसद है कि पात्र परिवार योजना के लाभ से बाहर न रह जाएं. अब पक्की छत इन परिवारों के लिए सिर्फ मकान नहीं, बल्कि बारिश और मौसम से सुरक्षा का भरोसा भी है. अबूझमाड़ में योजनाओं की पहुंच बढ़ने के साथ बदलाव की तस्वीर भी धीरे-धीरे सामने आ रही है. जगदलपुर. बस्तर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है. इसी कड़ी में नोवल डेयरी से पनीर का नमूना लेकर जांच के लिए रायपुर की प्रयोगशाला भेजा गया है. अब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी. लेकिन प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ सैंपल लेने तक सीमित नहीं रही. पनीर बेचने और इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों की बैठक भी बुलाई गई. किराना दुकानदारों, डेयरी, होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और ढाबा संचालकों को नियमों की जानकारी दी गई. कारोबारियों को एनालॉग पनीर के क्रय-विक्रय से पूरी तरह बचने के निर्देश दिए गए. साथ ही खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रख-रखाव को लेकर भी जागरूक किया गया. बारिश के मौसम में खाद्य सामग्री जल्दी खराब होने की संभावना को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने कहा गया. प्रशासन ने कारोबारियों को जागरूक करने के लिए पोस्टर और पंपलेट भी बांटे. अब निगरानी का अगला फोकस खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और उसके रख-रखाव पर रहेगा. यानी बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जांच के साथ कारोबारियों को नियमों का पालन कराने पर भी जोर है. खाद्य सुरक्षा का सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है, इसलिए यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के लिए भी अहम है. जगदलपुर. डिमरापाल के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच मरीजों की परेशानियों ने अलग तस्वीर सामने रखी है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इलाज के साथ अस्पताल की सूचना व्यवस्था को भी बेहतर करने की जरूरत है. खासकर जांच, रिपोर्ट और बिलिंग की जानकारी के लिए उन्हें अलग-अलग काउंटरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. गंभीर मरीज के साथ आए परिजनों के लिए ऐसी स्थिति परेशानी और चिंता दोनों बढ़ा सकती है. मरीजों की सबसे बड़ी मांग उपचार शुरू होने से पहले खर्च की स्पष्ट जानकारी देने की है. पैकेज, जांच, दवाइयों और अतिरिक्त खर्च को लेकर पारदर्शिता की मांग उठ रही है. इसी तरह जांच के बाद रिपोर्ट तैयार होने की जानकारी भी आसानी से मिलने की व्यवस्था मांगी गई है. मरीजों का सुझाव है कि मोबाइल संदेश, डिजिटल डिस्प्ले या हेल्प डेस्क जैसी सुविधा शुरू की जा सकती है. दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता भी अहम है. अपॉइंटमेंट और ओपीडी की जानकारी पहले से मिलने पर मरीज अपना समय और खर्च बचा सकते हैं. मरीजों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ मजबूत सूचना व्यवस्था भी जरूरी है. अब सवाल अस्पताल की सुविधाओं के दावों से ज्यादा उन सुविधाओं को मरीजों तक आसान तरीके से पहुंचाने का है. मरीजों ने शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था की मांग भी की है. जगदलपुर. बस्तर जिला अस्पताल की पार्किंग से बाइक चोरी की शिकायत ने पुलिस की जांच को तीन चोरी की मोटरसाइकिलों तक पहुंचा दिया. 2 अगस्त को अस्पताल पार्किंग से बाइक चोरी होने की शिकायत पुलिस को मिली थी. जांच के दौरान पुलिस ने पहले मुख्य आरोपी आकाश नाग को गिरफ्तार किया. पूछताछ और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस दूसरे आरोपी तक पहुंची. 8 अगस्त को कारली गीदम निवासी मोहन कुंजाम को गिरफ्तार किया गया. उसके कब्जे से तीन हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं. जानकारी के मुताबिक आरोपी पहले भी अपराधों में जेल जा चुका है. थाना परपा के दो अलग-अलग मामलों में वह जेल में बंद था. हाल ही में जेल से बाहर आने के बाद फिर वाहन चोरी की वारदातों में शामिल होने की बात सामने आई है. फिलहाल पुलिस बरामद मोटरसाइकिलों के संबंध में आगे की जांच कर रही है. इस कार्रवाई में पुलिस टीम के कई अधिकारियों और जवानों की भूमिका रही. अस्पताल जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर वाहन चोरी रोकना भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है. मामले ने अस्पताल परिसर की सुरक्षा और वाहन पार्किंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं.
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