राष्ट्रवाणी: How To Remove Mold From Bathroom Walls: बाथरूम में नमी रहना आम बात है, लेकिन जब यही नमी लंबे समय तक बनी रहती है तो दीवारों, टाइल्स और ग्राउट पर फफूंदी जमने लगती है. शुरुआत में छोटे-छोटे काले, हरे या सफेद निशान दिखाई देते हैं, लेकिन समय पर सफाई न की जाए तो यह धीरे-धीरे फैल सकते हैं. फफूंदी के साथ बाथरूम में सीलन जैसी बदबू भी आने लगती है. इसलिए अगर आपके बाथरूम की दीवारों पर फफूंदी जम गई है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते साफ करना बेहतर है. कुछ आसान तरीकों से आप बाथरूम की प्रभावित सतहों की सफाई कर सकते हैं. बाथरूम की दीवारों पर फफूंदी क्यों जमती है?
बाथरूम में पानी और भाप की वजह से नमी ज्यादा रहती है. अगर वहां हवा का सही सर्कुलेशन नहीं है या पानी लंबे समय तक दीवारों और दूसरी सतहों पर जमा रहता है, तो फफूंदी पनपने के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है. शॉवर के आसपास की दीवारें, टाइल्स और ग्राउट पर यह समस्या ज्यादा दिखाई दे सकती है. साबुन के अवशेष और शरीर से निकलने वाला तेल भी सतह पर जमा होता रहता है, जिससे गंदगी और फफूंदी की समस्या बढ़ सकती है. फफूंदी अलग-अलग रंगों में दिखाई दे सकती है. काले, हरे या लाल रंग के छोटे-छोटे धब्बे टाइल्स, दीवारों या ग्राउट पर नजर आ सकते हैं. वहीं फफूंदी से पहले दिखने वाली मिल्ड्यू आमतौर पर सफेद, सपाट और पाउडर जैसी दिखाई देती है. अगर बाथरूम में लगातार सीलन जैसी बदबू आ रही है और सफाई के बावजूद यह बनी रहती है, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बाथरूम की सतह पर लगी फफूंदी साफ करने के लिए सफेद सिरके का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए एक स्प्रे बोतल में सफेद सिरका भरें और इसे फफूंदी वाली जगह, खासकर टाइल्स और ग्राउट पर अच्छी तरह स्प्रे करें. सिरके को सतह पर सूखने दें. इसके बाद एक बार फिर प्रभावित हिस्से पर सिरका स्प्रे करें और पुराने टूथब्रश या छोटे सफाई ब्रश की मदद से जिद्दी दागों को धीरे-धीरे रगड़ें. आखिर में सूखे माइक्रोफाइबर कपड़े से सतह साफ कर दें. एक जरूरी बात का ध्यान रखें. सिरके को ब्लीच या किसी दूसरे क्लीनिंग प्रोडक्ट के साथ न मिलाएं. अलग-अलग क्लीनिंग प्रोडक्ट्स को मिलाने से खतरनाक धुएं निकल सकते हैं. अगर आप बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो एक स्प्रे बोतल में थोड़ा पानी लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं. बोतल को अच्छी तरह हिलाने के बाद इस घोल को फफूंदी वाली दीवार, टाइल्स या दूसरी प्रभावित सतहों पर स्प्रे करें. अब स्पंज या ऐसी स्क्रबिंग पैड से सतह को साफ करें जिससे टाइल्स पर खरोंच न आए. सफाई के बाद पानी से सतह को धो दें. अगर दाग पूरी तरह साफ नहीं हुआ है, तो जरूरत के अनुसार इस प्रक्रिया को दोहराया जा सकता है. अगर फफूंदी का दाग आसानी से नहीं निकल रहा है, तो बेकिंग सोडा में थोड़ा गर्म पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाया जा सकता है. इस पेस्ट को प्रभावित हिस्से पर लगाकर करीब 10 मिनट तक छोड़ दें. इसके बाद छोटे सफाई ब्रश या पुराने टूथब्रश से सतह को रगड़ें और पानी से अच्छी तरह साफ कर दें. अगर बाथरूम के ग्राउट पर ज्यादा फफूंदी है, तो ग्राउट के लिए बनाए गए क्लीनर का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है. ब्लीच इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी फफूंदी और मिल्ड्यू की सफाई के लिए ब्लीच का इस्तेमाल भी किया जाता है, लेकिन इसके साथ सावधानी बरतना जरूरी है. ब्लीच को पानी के साथ मिलाकर घोल तैयार किया जाता है और इसे प्रभावित सतह पर लगाया जा सकता है. सफाई के दौरान हाथों में ग्लव्स पहनें और बाथरूम में अच्छी वेंटिलेशन रखें. खिड़की खोलें या एग्जॉस्ट फैन चलाएं. सफाई के बाद सतह को अच्छी तरह पानी से धोकर साफ माइक्रोफाइबर कपड़े से सुखा दें. दोबारा फफूंदी न जमे, इसके लिए क्या करें?
सिर्फ फफूंदी साफ करना काफी नहीं है. बाथरूम में नमी कम रखना भी जरूरी है. नहाने के बाद दीवारों, कांच और फर्श पर जमा अतिरिक्त पानी को कपड़े या स्क्वीजी से हटा दें. इससे सतह पर नमी लंबे समय तक नहीं टिकेगी. नहाते समय और उसके बाद बाथरूम का एग्जॉस्ट फैन चलाएं या खिड़की खोल दें. शॉवर के बाद दरवाजा या पर्दा खुला रखने से भी हवा का सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है. बाथरूम की नियमित सफाई भी जरूरी है. हफ्ते में कम से कम एक बार सफाई करने से साबुन के अवशेष और दूसरी गंदगी जमा होने से रोकी जा सकती है. अगर फफूंदी बहुत बड़े हिस्से में फैल गई है, बार-बार साफ करने के बाद वापस आ रही है या बाथरूम में पानी से बड़ा नुकसान हुआ है, तो प्रोफेशनल की मदद लेना बेहतर है. लगातार सीलन की बदबू भी किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकती है. अगर पानी की वजह से दीवार के अंदर फफूंदी फैलने की आशंका है, तो केवल ऊपर से सफाई करना पर्याप्त नहीं होगा. ऐसे मामले में समस्या की जड़ का पता लगाकर उसे ठीक करना जरूरी है. बाथरूम की फफूंदी को समय पर साफ करने के साथ-साथ नमी और वेंटिलेशन का ध्यान रखा जाए, तो इस समस्या को दोबारा बढ़ने से काफी हद तक रोका जा सकता है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

