राष्ट्रवाणी: Headache And Dizziness Brain Tumor Symptoms: लगातार या बार-बार होने वाले सिरदर्द को अक्सर लोग तनाव, थकान, नींद की कमी या काम के दबाव से जोड़कर देखते हैं. ज्यादातर मामलों में सिरदर्द की वजह गंभीर नहीं होती, लेकिन जब इसके साथ चक्कर, कमजोरी, संतुलन बिगड़ना या दूसरे नए लक्षण दिखाई देने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षणों के पीछे कई कारण हो सकते हैं और सही वजह का पता लगाने के लिए मेडिकल जांच जरूरी होती है. ऐसा ही एक मामला 33 साल के काश राजू का सामने आया, जिन्होंने शुरुआत में अपने सिरदर्द और दूसरे लक्षणों को तनाव, डिहाइड्रेशन और व्यस्त पारिवारिक जिंदगी का असर माना. लेकिन जब समस्या बढ़ती गई और उन्हें चक्कर, पैरों में कमजोरी और चलने में अस्थिरता महसूस होने लगी, तो आगे की जांच में उनके दिमाग में एक बड़ा ग्रोथ मिला. बाद की जांच में उन्हें ग्रेड 4 एस्ट्रोसाइटोमा की जानकारी मिली. राजू के मामले में शुरुआत सिरदर्द से हुई थी. वह नई नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की देखभाल के साथ अपनी दिनचर्या चला रहे थे. उनके तीन छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र छह, पांच और दो साल है. ऐसे में उन्होंने सिरदर्द को ऐसी समस्या माना, जिसे रोजमर्रा के काम के बीच संभाला जा सकता है. लेकिन समय के साथ माइग्रेन ज्यादा बार होने लगा. इसके बाद चक्कर, पैरों में कमजोरी, मूड खराब रहने और पैरों के अस्थिर होने जैसी समस्याएं भी सामने आने लगीं. इसके बावजूद उन्होंने अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखी और जिम जाना भी बंद नहीं किया. शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद ज्यादा एक्सरसाइज या काम के तनाव की वजह से ऐसा हो रहा है. मेडिकल जांच में सामने आया ब्रेन ट्यूमर राजू ने मेडिकल मदद ली थी और उन्हें ऑप्टिशियन से मिलने की सलाह दी गई थी. बाद में एक पुराने दोस्त की अचानक मौत के बाद उन्होंने अपनी सेहत को लेकर दोबारा गंभीरता से सोचने का फैसला किया और इमरजेंसी विभाग पहुंचे. वहां किए गए सीटी स्कैन में उनके दिमाग में एक बड़ा ग्रोथ दिखाई दिया. इसके बाद उन्हें आगे की जांच के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया. एमआरआई समेत दूसरी जांचों के बाद डॉक्टरों ने उनके मामले का आकलन किया. जांच के बाद उन्हें ग्रेड 4 एस्ट्रोसाइटोमा होने की जानकारी दी गई. क्या होता है ग्रेड 4 एस्ट्रोसाइटोमा?
एस्ट्रोसाइटोमा एक प्रकार का ब्रेन ट्यूमर है, जो एस्ट्रोसाइट्स नाम की कोशिकाओं से विकसित होता है. ये कोशिकाएं दिमाग में मौजूद नर्व सेल्स को सपोर्ट करती हैं. एस्ट्रोसाइटोमा के अलग-अलग ग्रेड होते हैं. कुछ ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि हाई-ग्रेड ट्यूमर ज्यादा तेजी से बढ़ सकते हैं और आसपास के ब्रेन टिश्यू को प्रभावित कर सकते हैं. कैंसर रिसर्च यूके के अनुसार, ग्रेड 4 एस्ट्रोसाइटोमा हाई-ग्रेड कैंसर होते हैं. ट्यूमर के प्रकार और इलाज का पता लगाने के लिए डॉक्टर स्कैन, न्यूरोलॉजिकल जांच और जरूरत के अनुसार टिश्यू व मॉलिक्यूलर टेस्ट कर सकते हैं. ब्रेन ट्यूमर के लक्षण ट्यूमर की जगह और उसके असर पर निर्भर कर सकते हैं. सिरदर्द, दौरे, देखने में परेशानी, कमजोरी, शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन और संतुलन बिगड़ना जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. इलाज के करीब दो सप्ताह बाद राजू की नॉटिंघम स्थित क्वीन्स मेडिकल सेंटर में इमरजेंसी ब्रेन सर्जरी की गई. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्जरी के दौरान ट्यूमर का करीब 80 फीसदी हिस्सा निकाल दिया गया. सर्जरी के बाद इलाज का अगला चरण शुरू हुआ. राजू ने ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस के जरिए छह सप्ताह तक कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का कोर्स शुरू किया. इसके बाद आगे कीमोथेरेपी भी की जा सकती है. कब सिरदर्द को लेकर डॉक्टर से संपर्क करें?
हर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर का संकेत नहीं होता. सिरदर्द एक आम समस्या है और ज्यादातर मामलों में इसकी वजह ब्रेन ट्यूमर नहीं होती. मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल सिरदर्द होना आमतौर पर ब्रेन ट्यूमर का संकेत नहीं माना जाता. हालांकि, अगर सिरदर्द सामान्य से अलग हो या लगातार बढ़ रहा हो और इसके साथ दौरे, लगातार मतली या उल्टी, ज्यादा नींद आना, देखने या बोलने में परेशानी, व्यवहार में बदलाव या धीरे-धीरे बढ़ती कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो मेडिकल जांच करानी चाहिए. इन लक्षणों की कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय डॉक्टर से सही जांच कराना जरूरी है. Check out below Health Tools-Calculate Your Body Mass Index ( BMI ) Calculate The Age Through Age Calculator जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

