राष्ट्रवाणी: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर न रहकर इथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और …और पढ़ें नितिन गडकरी ने किसानों और मिलों की आय बढ़ाने पर दिया जोर चीनी मिलें इथेनॉल, सीबीजी उत्पादन पर ध्यान दें। कृषि अवशेषों को ईंधन में बदलकर आय बढ़ाएं।
गन्ने के उप-उत्पादों से मूल्यवर्धन कर कमाई करें। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में इथेनॉल को लेकर दो मत चल रहे हैं, इसी बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी मिलों से केवल चीनी के प्रोडक्शन पर निर्भरता से आगे बढ़कर इथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और अन्य वैल्यू एडिशन प्रोडक्ट्स का व्यापक पोर्टफोलियो बढ़ाने की बात कही ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके और किसानों की आय मजबूत हो सके।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के एक्सीलेंस अवॉर्ड सेरेमनी को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि चीनी मिलें केवल चीनी पर निर्भर नहीं रह सकतीं क्योंकि चीनी एक वैश्विक वस्तु है। दुनिया के बड़े उत्पादक देश अगर ज्यादा चीनी पैदा कर दें, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें तेजी से गिर जाती हैं।
इससे भारतीय मिलों को भी नुकसान होता है, क्योंकि कीमतें सिर्फ भारत के अंदर नहीं, बल्कि दुनिया भर की मांग-आपूर्ति पर निर्भर करती हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र में विविधीकरण (Diversification) जरूरी है। उन्होंने कहा कि “ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र की ओर कृषि का डायवर्सिफिकेशन” एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसकी वे 2004 से वकालत करते आ रहे हैं, और साथ ही यह भी कहा कि नॉलेज और टेक्नोलॉजी को धन में परिवर्तित करना कृषि के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।
गडकरी ने कहा कि चीनी मिलों को एग्री वैल्यू चेन में उत्पन्न होने वाले बॉय-प्रोडक्ट्स और वेस्टेज के इकॉनमिक वैल्यू पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने इस दृष्टिकोण को “वेस्ट से इकॉनमी” बताया और तर्क दिया कि गन्ने की खोई, धान का पुआल, बांस और नेपियर घास जैसे कृषि अवशेषों को ईंधन और अन्य उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है।
वैश्विक चीनी बाजार का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि ब्राजील में बड़े पैमाने पर मशीनीकृत गन्ना खेती और इसकी उत्पादन लागत, देश में जरूरत से ज्यादा होने पर अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार, भारतीय चीनी मिलें केवल चीनी के रेवेन्यू पर निर्भर नहीं रह सकतीं और उन्हें उप-उत्पादों (By-products) के माध्यम से अधिक रेवेन्यू के सोर्स बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने चीनी उद्योग के लिए प्रमुख अवसरों में से एक के रूप में इथेनॉल पर जोर दिया। गन्ने के रस और अन्य कच्चे माल को इथेनॉल में बदला जा सकता है, जबकि डिस्टिलरी और इंटीग्रेटेज शुगर कॉम्प्लेक्स प्रोसेसिंग के दौरान उत्पन्न प्रोडक्ट्स से एक्स्ट्रा वैल्यू हासिल कर सकते हैं। गडकरी ने चीनी मिलों और किसानों के लिए एक और प्रमुख आजीविका के रूप में CBG की क्षमता की ओर भी इशारा किया।
उन्होंने कहा कि धान के भूसे, बांस, गन्ने की खोई और नेपियर घास से कंप्रेस्ड बायो गैस का उत्पादन करने की तकनीक अब उपलब्ध है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में 1,908 सीबीजी प्लांट रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 132 एक्टिव हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गडकरी के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में सालाना लगभग 22 मिलियन टन धान का पुआल जलाया जाता है, जो बायो एनर्जी प्रोडक्शन के लिए एक महत्वपूर्ण संभावित कच्चा माल है।
उन्होंने कहा कि कृषि अवशेषों को ईंधन में बदलने से अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या का समाधान हो सकता है, फॉसिल फ्यूल्स के आयात में कमी आ सकती है और किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत भी उत्पन्न हो सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गन्ने की प्रोसेसिंग से प्राप्त उत्पादों में भी मूल्यवर्धन किया जा सकता है।
चीनी मिलों से निकलने वाले प्रेस मड और मोम का उपयोग उच्च मूल्य वाले अनुप्रयोगों में किया जा सकता है। उन्होंने सतारा की चीनी मिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गन्ने की प्रोसेसिंग से प्राप्त मोम ₹300-₹350 प्रति किलोग्राम तक बिकता है और इसका उपयोग ब्यूटी प्रोडक्ट सेक्टर में किया जाता है।

