राष्ट्रवाणी (बिलासपुर ब्यूरो): प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ क्षेत्र में जहरीले सांप के काटने से महाराष्ट्र निवासी युवक की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने उसके परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि मृतक दूसरे राज्य का निवासी था, केवल इस आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
कलेक्टर राजनांदगांव को आदेश की प्रति मिलने के 60 दिन के भीतर पात्र परिजन को राशि देने के निर्देश दिए गए हैं। तहसीलदार ने 20 जून 2022 को दावा खारिज करते हुए कहा था कि मृतक महाराष्ट्र का निवासी था, इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी नागपुर के कलेक्टर की है। इसके खिलाफ पिता ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
राज्य सरकार ने स्थायी निवासी होने की शर्त का हवाला दिया, जबकि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सर्पदंश से मौत पर चार लाख रुपये सहायता के प्रावधान का उल्लेख किया। हाई कोर्ट ने कहा कि घटना छत्तीसगढ़ में हुई थी और यह मुआवजे के दावे से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य है। राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों की जांच किए बिना केवल निवास के आधार पर दावा खारिज करना उचित नहीं था।
कोर्ट ने तहसीलदार का आदेश निरस्त कर दिया। कलेक्टर अब केवल पात्र परिजन की पहचान और भुगतान की औपचारिकताएं पूरी करेंगे। पात्रता का प्रश्न दोबारा नहीं खोला जा सकेगा।

