राष्ट्रवाणी: रायपुर। सड़क हादसे में मौत रोकने के लिए अब सिर्फ दुर्घटना वाले स्थानों को सुधारने तक सीमित नहीं रहा जाएगा। हादसा होने से पहले उसकी रोकथाम, दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने और वहां समय पर इलाज तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिवहन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा में ‘जीरो फेटेलिटी’ का लक्ष्य रखते हुए परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और नगरीय निकायों को मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट पर सुधार की कार्रवाई की समीक्षा की गई।

इसके अलावा वाहनों की फिटनेस जांच, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, ई-ट्रैक के जरिए कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट और लंबित ई-चालानों की वसूली की स्थिति भी देखी गई। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना की सूचना से लेकर एंबुलेंस के पहुंचने और घायल को अस्पताल में उपचार मिलने तक विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया।

वाहनों की फिटनेस जांच में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटन स्थलों तक परिवहन कनेक्टिविटी बेहतर करने के साथ ही दूरस्थ और परिवहन से वंचित इलाकों में नए बस मार्ग शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आरटीओ में रहेगा हर वाहन मालिक का मोबाइल नंबर
वाहन मालिक का मोबाइल नंबर बदल गया और आरटीओ के रिकॉर्ड में पुराना नंबर ही दर्ज है तो ई-चालान समेत वाहन से जुड़ी जरूरी सूचनाएं उस तक नहीं पहुंच पातीं।

इस वजह से राज्यभर में 100 करोड़ से ज्यादा का ई चालान पेंडिंग है। अब परिवहन विभाग इस समस्या को दूर करने के लिए सारथी एप में मोबाइल नंबर खुद अपडेट करने की व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसमें वाहन मालिक को मोबाइल नंबर बदलने के लिए आरटीओ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

वह ऑनलाइन अपना नया नंबर अपडेट कर सकेगा और यह नंबर सीधे परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगा। यह सुविधा सिर्फ पुराने नंबर को बदलने तक सीमित नहीं होगी। वाहन बिकने के बाद नए मालिक का मोबाइल नंबर भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपडेट किया जा सकेगा।

अभी कई मामलों में वाहन मालिक बदल जाने के बावजूद आरटीओ रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नंबर ही दर्ज रहता है। नंबर अपडेट कराने के लिए कार्यालय जाने की प्रक्रिया के कारण भी कई लोग इसे नहीं कराते। मोबाइल नंबर सही और अपडेट रहने का सीधा असर ई-चालान की सूचना पर पड़ेगा।

राज्य में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के ई-चालान लंबित हैं। वाहन मालिक का सही मोबाइल नंबर रिकॉर्ड में रहने पर चालान की सूचना समय पर भेजना आसान होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा सामने आती है, जहां वाहन खरीदते समय दर्ज कराया गया मोबाइल नंबर बाद में बंद हो जाता है या बदल जाता है, लेकिन आरटीओ रिकॉर्ड में नया नंबर दर्ज नहीं हो पाता।

नई व्यवस्था में वाहन मालिक को इसके लिए दफ्तर जाने की जरूरत नहीं रहेगी। केंद्र के परिवहन पोर्टल पर भी वाहन मालिकों को आरटीओ कार्यालय गए बिना मोबाइल नंबर अपडेट करने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। राज्य में सारथी एप के जरिए ऐसी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत बस्तर-सरगुजा में अभी 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें चल रही हैं। इन बसों के संचालन पर करीब 10 करोड़ रुपए सालाना खर्च हो रहे हैं। अब योजना को उन इलाकों तक बढ़ाने की तैयारी है, जहां अभी नियमित परिवहन सुविधा नहीं है।

इनमें गरियाबंद, मैनपुर, बलौदाबाजार, मोहला-मानपुर, कोरबा, पेंड्रा, कसडोल के साथ कवर्धा और बेमेतरा के पहुंचविहीन गांवों में नए मार्ग शुरू करने की तैयारी है।

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