राष्ट्रवाणी: बाजार में मिलने वाले डाई कलर्स का इस्तेमाल कपड़े, धागे और कई तरह की चीजों को रंगने के लिए किया जाता है. रंगों की कीमत और उपलब्धता को देखते हुए इनका इस्तेमाल छोटे स्तर के काम से लेकर उद्योगों तक में होता है. लेकिन हर डाई एक जैसा नहीं होता. कुछ सिंथेटिक डाइज में मौजूद केमिकल्स के संपर्क में लंबे समय तक रहने पर त्वचा में जलन, एलर्जी या सांस से जुड़ी परेशानी हो सकती है. इसलिए डाई खरीदते और इस्तेमाल करते समय उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जानकारी रखना जरूरी है. डाई कलर में अलग-अलग प्रकार के केमिकल कंपाउंड्स इस्तेमाल किए जाते हैं. कुछ रंगों में ऐसे पदार्थ पाए जाते हैं जो सीधे त्वचा के संपर्क में आने पर इरिटेशन या एलर्जी की समस्या पैदा कर सकते हैं. खासकर अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक बिना ग्लव्स के डाई के साथ काम करता है तो त्वचा पर इसका असर पड़ सकता है. कपड़ों को रंगते समय केमिकल पानी में भी मिलते हैं. अगर डाई का इस्तेमाल तय मात्रा और सही तरीके से नहीं किया जाता तो रंग का पानी आसपास के जल स्रोतों में पहुंच सकता है. इससे पर्यावरण पर भी असर पड़ता है. इसलिए केवल कम कीमत देखकर कोई भी डाई खरीदना सही नहीं है. कुछ सिंथेटिक डाइज से संवेदनशील लोगों में कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस यानी त्वचा पर लालिमा, खुजली या जलन जैसी समस्या हो सकती है. यह समस्या हर व्यक्ति में नहीं होती और इसका असर इस्तेमाल किए गए केमिकल, संपर्क की अवधि और व्यक्ति की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है.अगर डाई का काम करते समय त्वचा पर खुजली, जलन, लाल चकत्ते या आंखों में परेशानी महसूस होती है तो तुरंत संपर्क कम करना चाहिए. काम के दौरान ग्लव्स, मास्क और जरूरत के अनुसार प्रोटेक्टिव गॉगल्स का इस्तेमाल करना भी जरूरी है.खासकर बच्चों को ऐसे रंगों से दूर रखना चाहिए. डाई पाउडर को खुला छोड़ने से उसके कण हवा में फैल सकते हैं और सांस के साथ शरीर में जा सकते हैं. इसलिए इन्हें बंद कंटेनर में रखना और इस्तेमाल के बाद हाथ अच्छी तरह धोना जरूरी है. कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले सभी डाइज खतरनाक नहीं होते. कई रंग टेक्सटाइल इंडस्ट्री में तय सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के अनुसार इस्तेमाल किए जाते हैं. समस्या तब बढ़ती है जब बिना गुणवत्ता जांच वाले या गलत केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है. कपड़े खरीदते समय अगर रंग बहुत ज्यादा निकल रहा है तो उसे इस्तेमाल से पहले अलग से धो लेना अच्छा रहता है. खासकर बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले रंगों की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए. डाई कलर का इस्तेमाल करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि प्रोडक्ट की जानकारी और निर्देश पढ़ें. बिना लेबल या बिना स्पष्ट जानकारी वाले रंगों से बचना बेहतर है. अगर आप बड़े स्तर पर कपड़े रंगने का काम करते हैं तो स्थानीय सुरक्षा नियमों और निर्धारित केमिकल हैंडलिंग प्रक्रिया का पालन करें.याद रखें, हर डाई कलर जहरीला नहीं होता, लेकिन कुछ केमिकल्स का गलत इस्तेमाल स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. इसलिए सस्ता रंग खरीदने के बजाय उसकी गुणवत्ता, इस्तेमाल का तरीका और सुरक्षा निर्देश जरूर देखें. निर्जला गौड़ इस वक्त ABP Live की लाइफस्टाइल डेस्क पर इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं. वह मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में अपनी डिग्री कर रही हैं. इससे पहले वह EBNW Stories में कंटेंट राइटर के तौर पर इंटर्नशिप कर चुकी हैं. डिजिटल जर्नलिज्म और कंटेंट क्रिएशन में उनकी खास रुचि है. आसान, आकर्षक और रिलेटेबल अंदाज में कहानियों को पेश करना और पाठकों तक जानकारी को प्रभावी तरीके से पहुंचाना उनकी खासियत है. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

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