बिजनौर/हरिद्वार. उत्तर प्रदेश के मंत्री रघुराज सिंह ने कहा कि जो लोग किसी विशेष धर्म को नहीं मानते, उन्हें अपने प्रतिष्ठानों का नाम उस धर्म के नाम पर नहीं रखना चाहिए. उनकी यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब मुजफ्फरनगर में एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा ‘पंडित जी का वैष्णो ढाबा’ नाम से एक ढाबा संचालित करने मामला सामने आया है जो कथित तौर पर आड़ लेने के लिए ‘पंडित’ नाम का इस्तेमाल कर रहा था. ढाबे के एक कर्मचारी ने भी खुद का नाम ‘गोपाल’ बताया, जबकि उसके आधार कार्ड से पता चला कि वह मुस्लिम है.

नगीना में मंगलवार शाम कांवड़ यात्रा को लेकर सिंह ने कहा, ”जो लोग किसी धर्म में विश्वास नहीं रखते, उन्हें अपने ढाबों या दुकानों का नाम उस धर्म के नाम पर नहीं रखना चाहिए.” उन्होंने विशेष रूप से अन्य धर्मों के लोगों द्वारा अपने ढाबे का नाम ‘वैष्णो ढाबा’ रखने पर आपत्ति जताई. मंत्री नगीना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह की मां के निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे थे.

उत्तराखंड: साधु-संतों ने कांवड़ यात्रा में गैर हिंदुओं के प्रवेश, व्यवसाय पर रोक लगाने की मांग की

साधु-संतों ने उत्तराखंड सरकार से 11 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा की “धार्मिक मर्यादा और पवित्रता बनाए रखने” के लिए उसमें गैर हिंदुओं के प्रवेश और व्यवसाय पर रोक लगाने की बुधवार को मांग की. भारत साधु समाज के संतों ने यहां एक बैठक में कांवड़ यात्रा में मुसलमान समुदाय के लोगों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की. इससे पहले, जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि भी इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र लिख चुके हैं .

बैठक के बाद हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद ने यात्रा मार्ग पर खाद्य पदार्थों की पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर हिंदुओं की पहचान सुनिश्चित करने और मुसलमानों के कांवड़ ले जाने पर भी रोक लगाने की मांग की. उन्होंने कहा, “कांवड़ यात्रा में जेहादी मानसिकता वाले लोगो को नहीं घुसने दिया जाना चाहिए . प्रशासन खाद्य पदार्थों की दुकानों में भी गैर हिंदुओं की पहचान सुनिश्चित करे ताकि खान-पान में पवित्रता बनी रहे.” इसी के साथ, उन्होंने शिव भक्तों से भी अपील की कि वह मुसलमानों द्वारा बनाई गयी कांवड़ को नहीं लेकर जाए क्योंकि इससे भगवान शिव के अभिषेक के लिए ले जाया गया गंगा जल अपवित्र हो जाता है.

उन्होंने कहा, “शिव भक्त कांवड़ को शुद्ध रूप में लेकर जाएं. अगर हिंदू खुद कांवड़ नहीं बना सकते तो वे एक डंडे में रस्सी से गंगा जल के पात्र को बांधकर ले जाए जिससे गंगा जल की पवित्रता बनी रहे.” यतींद्रानंद गिरि ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि हर वर्ष श्रावण मास में होने वाली कांवड़ यात्रा सनातन धर्म की एक अत्यंत पवित्र, भावनात्मक व आस्था से जुड़ी यात्रा है जिसे हाल के वर्षों में विर्धिमयों से गहरी चुनौती मिल रही है .

उन्होंने कहा कि गैर हिंदू समुदाय के लोग कांवड़ यात्रा मार्ग पर भगवा वस्त्र, भगवान शिव के चित्र व कांवड आदि की बिक्री करते हैं.
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, पूजा सामग्री को मिलावट कर अपवित्र करने तथा सेवा के नाम पर भोजन व खाद्य सामग्री आदि के वितरण में मिलावट व थूक मिलाने जैसी गंभीर घटनाएं भी सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से सामने आती रही हैं.

स्वामी यतींद्रानंद ने कहा, “जेहादी मानसिकता वाले लोगों की इस तरह की हरकते न केवल हिंदू आस्था का अपमान हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द को खंडित करने का भी कुत्सित प्रयास है.” उन्होंने कहा, “कांवड़ यात्रा में किसी भी गैर हिंदू को सेवा, व्यवसाय तथा किसी अन्य तरह से भाग लेने को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.” उन्होंने मुख्यमंत्री से हरिद्वार से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा के मार्ग पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, कांवड़ बाजार में किसी भी मुसलमान को दुकान लगाने की अनुमति न देने, धार्मिक वस्तुओं की बिक्री का अधिकार केवल हिंदू समुदाय के लोगों को देने तथा कांवड़ मेले में सभी आवश्यक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की. उन्होंने इसके साथ ही जिला स्तर पर एक निगरानी समिति का भी गठन करने की मांग की. पत्र में कह गया है कि सनातन की रक्षा हेतु प्रशासन को सभी मांगो पर तत्काल संज्ञान लेते हुए करवाई करना चाहिए ताकि कांवड़ यात्रा में पवित्रता, सुरक्षा और श्रद्धा बनी रहे.

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