राष्ट्रवाणी: How To Clean Dirty Doormats At Home: घर के दरवाजे पर रखा पैर पोछने वाला यानी डोरमैट सबसे ज्यादा गंदगी झेलने वाली चीजों में से एक होता है. बाहर से घर के अंदर आने से पहले जूते-चप्पलों के साथ लगी मिट्टी, धूल, नमी और दूसरी गंदगी इसी पर निकलती है. बारिश के मौसम में तो इसकी हालत और भी खराब हो जाती है. लगातार इस्तेमाल के कारण डोरमैट पर इतनी धूल और गंदगी जम जाती है कि कई बार वह खुद गंदा नजर आने लगता है. डोरमैट का काम ही घर के अंदर गंदगी और नमी को आने से रोकना है, इसलिए इसकी सफाई पर ध्यान देना भी जरूरी है. अगर इसे लंबे समय तक साफ न किया जाए तो इसमें धूल, मिट्टी और नमी जमा होती रहती है. इससे डोरमैट से बदबू भी आने लग सकती है और उसकी सफाई करने की क्षमता भी कम हो सकती है. ऐसे में कुछ आसान तरीकों से घर पर ही पैर पोछने वाले को साफ किया जा सकता है. डोरमैट को नियमित साफ करना क्यों जरूरी है?

दरवाजे पर रखा डोरमैट लगातार धूल, मिट्टी और नमी के संपर्क में रहता है. समय के साथ यह गंदगी मैट के रेशों के अंदर तक चली जाती है. अगर इसे साफ न किया जाए तो डोरमैट घर के अंदर गंदगी फैलाने का कारण भी बन सकता है. नियमित सफाई से जमा धूल और गंदगी हटती रहती है और मैट ज्यादा साफ और स्वच्छ बना रहता है. सिर्फ साफ-सफाई ही नहीं, डोरमैट की उम्र बढ़ाने के लिए भी उसकी देखभाल जरूरी है. रेशों में फंसी मिट्टी और छोटे कण लगातार रगड़ खाते रहते हैं, जिससे मैट धीरे-धीरे खराब हो सकता है. रबर वाले डोरमैट में ज्यादा गंदगी और नमी जमा रहने से उसकी पकड़ भी प्रभावित हो सकती है. समय-समय पर सफाई करने से मैट लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा साफ डोरमैट घर के दरवाजे को भी बेहतर लुक देता है. गंदा और दागदार पैर पोछने वाला घर के प्रवेश द्वार की पूरी खूबसूरती खराब कर सकता है, जबकि साफ डोरमैट दरवाजे को साफ-सुथरा दिखाता है. हर डोरमैट को वॉशिंग मशीन में नहीं धोया जा सकता. इसलिए सबसे पहले उसके साथ दिए गए केयर इंस्ट्रक्शन को जरूर पढ़ें. कोयर जैसे प्राकृतिक रेशों से बने मैट को मशीन में डालने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उसके रेशे खराब हो सकते हैं. हल्के इनडोर डोरमैट मशीन में धोए जा सकते हैं, लेकिन रबर बैक वाले मैट को मशीन में डालने से पहले उसके निर्देश जरूर जांच लें. धुलाई से पहले मैट को बाहर ले जाकर अच्छी तरह झाड़ें, ताकि ऊपर जमी मिट्टी और धूल निकल जाए. इसके बाद वैक्यूम क्लीनर की मदद से रेशों के अंदर फंसी गंदगी निकालें. अब मशीन में मैट डालकर हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें. जरूरत हो तो बदबू हटाने के लिए थोड़ा बेकिंग सोडा भी इस्तेमाल किया जा सकता है. मैट को जेंटल वॉश साइकिल पर धोना बेहतर रहेगा. धुलाई के बाद डोरमैट को ड्रायर में डालने से बचें. ज्यादा गर्मी से उसके रेशे या चिपकने वाला हिस्सा खराब हो सकता है. इसे बाहर खुली हवा में अच्छी तरह सुखाएं. हाथ से डोरमैट साफ करने का आसान तरीका अगर डोरमैट भारी है या बाहर इस्तेमाल होता है, तो हाथ से सफाई करना ज्यादा बेहतर हो सकता है. इसके लिए एक बाल्टी में गुनगुना पानी लें और उसमें थोड़ा सा हल्का डिटर्जेंट या डिश सोप मिलाएं. बदबू हटाने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. अब एक ब्रश की मदद से डोरमैट को हल्के हाथ से रगड़ें. गोल-गोल तरीके से ब्रश चलाने से रेशों में फंसी गंदगी बाहर निकलने में मदद मिलती है. अगर किसी जगह पर ज्यादा दाग है, तो सफाई के घोल को कुछ मिनट के लिए वहां लगा रहने दें और फिर ब्रश से साफ करें. सफाई के बाद डोरमैट को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं, ताकि साबुन और गंदगी पूरी तरह निकल जाए. रबर बैक वाले मैट को बहुत ज्यादा देर तक पानी में भिगोकर न रखें, क्योंकि इससे उसकी पकड़ कमजोर हो सकती है. आखिर में मैट को पूरी तरह सुखाना सबसे जरूरी है. इसे धूप या खुली हवा वाली जगह पर फैलाकर या लटकाकर सुखाएं. गीले डोरमैट को दोबारा दरवाजे पर रखने से उसमें फफूंदी, बदबू और नमी की समस्या हो सकती है. डोरमैट को ज्यादा समय तक साफ रखने के टिप्स डोरमैट को कुछ हफ्तों में एक बार उलट-पलट कर इस्तेमाल करें. इससे एक ही हिस्से पर लगातार ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा और मैट जल्दी खराब नहीं होगा. घर में इस्तेमाल होने वाले मैट को नियमित रूप से झाड़ते रहें और जरूरत के हिसाब से वैक्यूम करें. अगर मैट पर दाग जल्दी लगते हैं, तो सफाई के बाद उपयुक्त फैब्रिक प्रोटेक्टिव स्प्रे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इससे गंदगी और दाग आसानी से चिपकने से बच सकते हैं. सफाई का एक तय रूटीन बनाना भी फायदेमंद है. हफ्ते में एक बार डोरमैट को अच्छी तरह झाड़ें, जरूरत के हिसाब से वैक्यूम करें और कुछ समय बाद उसकी डीप क्लीनिंग करें. दरवाजे के पास जूते-चप्पल रखने के लिए शू रैक रख दें, ताकि बाहर की मिट्टी घर के अंदर कम पहुंचे. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

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