दुर्ग। भिलाई के एक निजी सीमेंट फैक्ट्री में मैकेनिकल इंजीनियर और सीएचपी इंचार्ज संजय तिवारी को पुलिस ने फैक्ट्री के कैप्टिव पावर प्लांट के एचओडी आर. बालाराजू की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 255 दिन बाद कोर्ट ने पाया कि यह हत्या नहीं बल्कि एक हादसा था।
संजय तिवारी 4 जून 2024 से 13 फरवरी 2025 तक जेल में रहे। जब रिहा हुए तब तक सब कुछ बदल चुका था। पत्नी ने साथ छोड़ दिया,
समाज ने ठुकरा दिया और नौकरी चली गई। कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर पुलिस विवेचना की गुणवत्ता और जल्दबाजी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोर्ट ने माना हत्या होना नहीं कर सके साबित
कोर्ट में प्रतिपरीक्षण में विवेचक और तत्कालीन जामुल थाना प्रभारी केशव कोसले ने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 19 में यह स्वीकार किया कि एफआईआर करने से पहले और सभी व्यक्तियों द्वारा यह बताया गया था कि मृतक आर. बाल राजू की मृत्यु गिर जाने की वजह से हुई है। इस प्रकार प्रकरण के विवेचक को मृतक आर. बालराजू की मृत्यु गिर जाने की वजह से दुर्घटना के स्वरूप की होने का साक्ष्य प्राप्त होना दर्शित है।
इस मामले में प्रति परिक्षण की कंडिका-15 में डॉक्टर ने यह स्वीकार किया है कि यदि कोई व्यक्ति उंचाई से कड़े और उबड़खाबड़ धरातल पर गिरे तो जैसी चोट मृतक को आई थी वैसी चोट आना संभावित है। मृत्यु का कारण सिर में चोट लगने की वजह और ज्यादा खून का बहना एवं हार्ट अटैक से होना प्रतीत होता है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मृतक को जो अब्रेजन की चोटें आई थी वह गिरने की वजह से आ सकती है।
डिजिटल साक्ष्य से साबित हुए निर्दोष
इस मामले में कोर्ट ने सारे डिजिटल साक्ष्य, गवाहों का बयान, पीएम रिपोर्ट को आधार मानते हुए फैसला संजय तिवारी के पक्ष में दिया। इस पूरे मामले में पुलिस की जांच में कहीं भी यह साबित नहीं हो सका कि यह हत्या थी और संजय ने इस वारदात को अंजाम दिया था। इस वजह से कोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाए गए संजय तिवारी को निर्दोष करार दिया। पीएम रिपोर्ट में आर. बालाराजू की मौत हार्ट अटैक से होना पाया गया।
पुलिस ने ही दर्ज की थी एफआईआर, लेकिन संजय का नाम नहीं
इस मामले में न तो एसीसी अडाणी जामुल कंपनी ने एफआईआर दर्ज करवाई थी और न ही मृतक के परिजनों ने अपराध दर्ज करवाया था। इस मामले में जामुल पुलिस ने ही हत्या का मामला दर्ज कर मुखबिर की सूचना पर संजय तिवारी को गिरफ्तार किया था। वहीं एफआईआर में भी संजय तिवारी का नाम नहीं था। केवल शंका के आधार पर बिना कोई सूचना के गिरफ्तार किया गया था कि उनके शर्ट पर खून के दाग हैं।
