शेयर बाजार में बड़ा बदलाव: SEBI ने शेयर बायबैक नियमों में किए प्रस्ताव, कंपनियों और निवेशकों पर होगा असर-भारत के शेयर बाजार नियामक SEBI ने शेयर बायबैक के नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इन बदलावों से कंपनियों और निवेशकों दोनों को फायदा हो सकता है। खास बात यह है कि SEBI ओपन मार्केट बायबैक की व्यवस्था फिर से शुरू करने की तैयारी में है, साथ ही बायबैक की समयसीमा भी कम करने का सुझाव दिया है।

SEBI का नया प्रस्ताव क्या कहता है?-SEBI ने कंसल्टेशन पेपर में कहा है कि ओपन मार्केट के जरिए शेयर बायबैक को अब 66 कार्य दिवसों के भीतर पूरा करना होगा, जबकि पहले यह अवधि छह महीने तक होती थी। इसका मकसद बायबैक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है ताकि बाजार की बदलती स्थिति के अनुसार काम हो सके।

बदलाव क्यों जरूरी है?-SEBI के अनुसार, शेयर बाजार में तेजी से बदलाव होते रहते हैं। अगर बायबैक प्रक्रिया लंबे समय तक चले तो उसका असर कम हो जाता है। इसलिए समयसीमा कम कर प्रक्रिया को तेज करना जरूरी है ताकि निवेशकों और कंपनियों दोनों को बेहतर फायदा मिल सके।

कंपनियों के लिए 40 फीसदी नियम जारी रहेगा-प्रस्ताव में कहा गया है कि कंपनियों को बायबैक ऑफर के पहले आधे समय में कम से कम 40 फीसदी राशि खर्च करनी होगी। यह नियम पहले भी था और अब इसे जारी रखा जाएगा। इससे कंपनियां बायबैक प्रक्रिया को लंबा खींचने से बचेंगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

शेयरधारकों को तुरंत सूचना देना जरूरी-SEBI ने सुझाव दिया है कि कंपनियों को बायबैक की घोषणा के एक कार्य दिवस के अंदर सभी शेयरधारकों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचना भेजनी होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों को समय पर सही जानकारी मिलेगी, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

ट्रेडिंग सिस्टम में बदलाव की संभावना-SEBI ने पुराने अलग ट्रेडिंग विंडो सिस्टम को हटाने का सुझाव दिया है। अब बायबैक से जुड़े लेनदेन सामान्य ट्रेडिंग सिस्टम के जरिए होंगे। इससे बाजार की प्रक्रिया सरल होगी और टैक्स के मामले में भी निवेशकों के बीच समानता आएगी।

प्रमोटर्स के शेयरों पर रोक का प्रस्ताव-प्रस्ताव में कहा गया है कि बायबैक अवधि के दौरान प्रमोटर्स और उनके सहयोगियों के शेयर ISIN स्तर पर फ्रीज किए जाएं। इससे प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी और बाजार में गलत फायदा उठाने की संभावना कम होगी।

मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता खत्म हो सकती है-SEBI ने बायबैक प्रक्रिया में मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता खत्म करने पर विचार किया है। फाइलिंग और दस्तावेजों की जिम्मेदारी कंपनियों, स्टॉक एक्सचेंज और अन्य अधिकारियों को दी जा सकती है। इससे कंपनियों की लागत कम होगी और प्रक्रिया आसान बनेगी।

जनता से सुझाव मांगे गए हैं-SEBI ने इन प्रस्तावों पर जनता और बाजार के लोगों से राय मांगी है। सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 29 मई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये बदलाव लागू होते हैं तो भारत में शेयर बायबैक प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, तेज और निवेशक हितैषी बनेगी।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि SEBI इन प्रस्तावों पर क्या अंतिम फैसला लेता है और इसका बाजार पर क्या असर पड़ता है।

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