राष्ट्रवाणी: How To Identify Termites In Wood Furniture At Home: लकड़ी के दरवाजे देखने में बिल्कुल ठीक लग सकते हैं, लेकिन कई बार उनके अंदर से दीमक लकड़ी को खोखला कर रही होती है. बाहर से लकड़ी पर कोई बड़ा निशान नजर नहीं आता और जब तक समस्या का पता चलता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है. यही वजह है कि दरवाजे में दीमक लगने के शुरुआती संकेतों को पहचानना जरूरी है. खासकर पुराने लकड़ी के दरवाजों, चौखटों और फर्नीचर में समय-समय पर कुछ आसान चीजें चेक करते रहना चाहिए. अगर शुरुआत में ही दीमक के संकेत मिल जाएं तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. दीमक के शुरुआती संकेतों में लकड़ी के आसपास जमा होने वाला बारीक पाउडर सबसे अहम है. अगर दरवाजे के नीचे, चौखट के पास या किसी कोने में हल्के रंग का दानेदार पाउडर दिखाई दे रहा है, तो इसे सिर्फ धूल समझकर नजरअंदाज न करें. सूखे लकड़ी वाले हिस्सों में रहने वाली दीमक लकड़ी के अंदर सुरंग बनाते समय अपना कचरा छोटे छेदों के जरिए बाहर निकालती है. यही कचरा नीचे जमा होकर पाउडर जैसा दिखाई दे सकता है. अगर इसे साफ करने के कुछ दिन बाद उसी जगह फिर से पाउडर दिखाई दे, तो यह संकेत हो सकता है कि लकड़ी के अंदर दीमक अभी भी सक्रिय है. पुराने लकड़ी के दरवाजे को ध्यान से देखें. अगर उसकी सतह पर छोटे गोल या अंडाकार छेद दिखाई दे रहे हैं, तो इन्हें नजरअंदाज न करें. ये छेद दीमक की गतिविधि का संकेत हो सकते हैं. अक्सर ऐसे छेद दरवाजे के किनारों, नीचे के हिस्से, चौखट के पीछे या उन जगहों पर दिखाई देते हैं जहां आमतौर पर सफाई के दौरान ध्यान नहीं जाता. इसलिए समय-समय पर दरवाजे की पूरी सतह को ध्यान से देखना जरूरी है. दीमक लकड़ी को अंदर से खाती है और कई बार बाहर की सतह को बिल्कुल वैसा ही छोड़ देती है. ऐसे में दरवाजा ऊपर से मजबूत और ठीक दिखाई दे सकता है, लेकिन अंदर से काफी खोखला हो चुका होता है. इसका पता लगाने के लिए लकड़ी की सतह पर उंगलियों या हाथ की पोर से हल्के से थपथपाएं. जिस हिस्से में लकड़ी ठोस होगी, वहां आवाज भारी और मजबूत सुनाई देगी. वहीं अंदर से खोखली हो चुकी लकड़ी पर थपथपाने से आवाज कुछ खाली या कागज जैसी लग सकती है. दरवाजे के अलग-अलग हिस्सों को थपथपाकर आवाज की तुलना करें. अगर किसी एक हिस्से की आवाज बाकी जगह से काफी अलग है, तो उस हिस्से की अच्छी तरह जांच करवाना बेहतर है. अगर लकड़ी के दरवाजे की पॉलिश किसी एक जगह से अचानक फूलने, उठने या उखड़ने लगी है, तो हर बार इसका कारण सिर्फ नमी या खराब पॉलिश नहीं होता. लकड़ी के अंदर दीमक की गतिविधि भी इसकी एक वजह हो सकती है. इसलिए अगर दरवाजा ऐसी जगह है जहां पानी या नमी की कोई समस्या नहीं है और फिर भी किसी खास हिस्से की पॉलिश ऊपर उठ रही है, तो उस हिस्से को ध्यान से जांचें. अगर दरवाजा जमीन के पास लगा है और उसकी चौखट या आसपास की दीवार पर पतली भूरी मिट्टी जैसी लाइन या सुरंग दिखाई दे रही है, तो यह भी दीमक का संकेत हो सकता है. जमीन के अंदर रहने वाली दीमक लकड़ी तक पहुंचने के लिए मिट्टी और अपनी लार से छोटी सुरंगें बनाती है. ये सुरंगें दरवाजे की चौखट, फर्नीचर के पैरों या दीवार के किनारे दिखाई दे सकती हैं. ऐसी सुरंग को सिर्फ तोड़कर छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं है. अगर अंदर दीमक सक्रिय है, तो वह दूसरी जगह से फिर सुरंग बना सकती है. दरवाजे के किसी हिस्से को दबाने पर अगर लकड़ी असामान्य रूप से नरम महसूस हो या हल्का दबाव पड़ते ही उसका हिस्सा टूटने लगे, तो यह दीमक से हुए गंभीर नुकसान का संकेत हो सकता है. दीमक लंबे समय तक लकड़ी के अंदर रहकर उसे खाती रहती है. धीरे-धीरे लकड़ी का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाता है और सिर्फ ऊपर की पतली परत बची रह सकती है. इस स्थिति में दरवाजा बाहर से ठीक दिख सकता है, लेकिन अंदर से काफी कमजोर हो चुका होता है. ऐसे में दरवाजे के नीचे के किनारों, चौखट के पास और उन हिस्सों को जरूर जांचें जहां सफाई के दौरान कम ध्यान जाता है. अगर दरवाजे पर इनमें से कोई संकेत दिखाई देता है, तो सबसे पहले यह पता लगाने की कोशिश करें कि दीमक सिर्फ एक छोटे हिस्से में है या आसपास की लकड़ी और फर्नीचर तक भी पहुंच चुकी है. केवल सामान्य कीटनाशक स्प्रे करके समस्या खत्म करने की कोशिश न करें. इससे लकड़ी के अंदर मौजूद दीमक तक दवा पहुंचना जरूरी नहीं है. सोनम एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. यहां वह लाइफस्टाइल कैटिगरी और इसके अंतर्गत आने वाली सब-कैटिगरीज हेल्थ, होम टिप्स, रिलेशनशिप, ट्रैवल, पैरेंटिंग, ब्यूटी और फैशन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. सोनम करीब 15 साल से लेखन की दुनिया में कार्यरत हैं. इससे पहले वह , के आईनेक्स्ट में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. इन सभी जगहों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. सोनम ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन किया है. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
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