बीजिंग/तेल अवीव/पेरिस. चीन की आधिकारिक मीडिया ने रविवार को ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिकी बमबारी की आलोचना करते हुए इसे रसातल की ओर उठाया गया एक और कदम बताया. वहीं, चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि हमलों में इस्तेमाल किये गए अमेरिकी ‘बंकर-बस्टर’ बम ईरान के भूमिगत परमाणु संयंत्रों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं.
अमेरिका ने रविवार की सुबह ईरान के फोर्दो, इस्फहान और नतांज परमाणु स्थलों पर हमला कर देश के परमाणु प्रतिष्ठानों को नष्ट कर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने तीन परमाणु स्थलों पर ”बहुत सफल” हमला किया है. चीन ने युद्ध को रोकने के लिए शनिवार को ईरान और इजराइल के बीच युद्ध विराम की अपील की थी. हालांकि, उसने अबतक अमेरिकी हवाई हमलों पर आधिकारिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है.
वहीं, सरकारी अखबार ‘चाइना डेली’ के संपादकीय में कहा गया है कि ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर अमेरिका द्वारा किया गया एकतरफा सैन्य हमला एक लापरवाही भरा कदम है तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है. इसमें कहा गया है कि इस तरह की एकतरफा नीति नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करती है तथा एक खतरनाक मिसाल कायम करती है.
चीन के विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकी अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता अब भी स्पष्ट नहीं है और हो सकता है कि ये हमले ईरान के भूमिगत परमाणु प्रतिष्ठानों को पूरी तरह नष्ट करने के लिए पर्याप्त न हों. ग्लोबल टाइम्स ने चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के सहायक अनुसंधानकर्ता ली जिक्सिन के हवाले से लिखा कि फोर्दो का परमाणु संयंत्र लगभग 100 मीटर की गहराई में स्थित है, जिससे इसे एक या दो हमलों से पूरी तरह नष्ट करना बहुत कठिन है, यहां तक ??कि बंकर-बस्टर बमों का उपयोग करके भी ऐसा नहीं किया जा सकता. सैन्य मामलों के विशेषज्ञ झांग जुनशे ने भी इसी तरह की राय व्यक्त की.
झांग ने कहा कि अमेरिका करीब 13,600 किलोग्राम का जीबीयू-57 बंकर बस्टर्स से लैस बी-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल करता है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे केवल 65 मीटर तक की गहराई ही भेद सकते हैं. उन्होंने कहा कि सिद्धांतत?, क्रम में दो बमों का उपयोग कर इस गहराई को भेदा जा सकता है, लेकिन इस रणनीति का कभी सार्वजनिक रूप से परीक्षण नहीं किया गया है, इसलिए प्रारंभिक हमले की सफलता अनिश्चित बनी हुई है. झांग ने कहा, ”हालांकि, अमेरिका द्वारा पहुंचाई गई क्षति निस्संदेह इजराइल द्वारा पहुंचाई गई क्षति से कहीं अधिक है.”
ईरान पर हुए अमेरिकी हमले में हम शामिल नहीं, लेकिन पहले से सूचना थी : ब्रिटेन
इजराइल के समर्थन में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर किये गए हमले पर ब्रिटेन ने कहा है कि वह इस कार्रवाई में शामिल नहीं है. हालांकि, उसे पहले से ही इसकी जानकारी दी गई थी. . ब्रिटेन के कैबिनेट मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने स्काई न्यूज को बताया कि ईरान पर अमेरिकी हमले की पहले ही सूचना दे दी गई थी. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में सूचित किया गया था. हालांकि हमले के समय की सटीक जानकारी नहीं दी गई थी. जोनाथन ने कहा कि अमेरिका ने समर्थन नहीं मांगा था और ब्रिटेन इसमें शामिल नहीं था.
उन्होंने कहा, ”हालांकि ब्रिटेन इन हमलों में शामिल नहीं है, लेकिन हम सभी संभावित परिस्थितियों के लिए व्यापक तैयारी कर रहे हैं.” मंत्री ने कहा कि ब्रिटिश सरकार अपने नागरिकों के साथ-साथ क्षेत्र में अपने सैन्य ठिकानों, र्किमयों और बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए काम कर रही है. वहीं, इजराइली सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि उनका देश अब भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान का आकलन कर रहा है.
ईरान के परमाणु केंद्रों पर हुए अमेरिकी हमले ने पश्चिम एशिया में स्थिति को और खराब किया
चीन के आधिकारिक मीडिया ने रविवार को कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु केंद्रो पर किए गए हमले ने पश्चिम एशिया में पहले से ही नाजुक स्थिति को और अधिक नरक बना दिया है. हालांकि बीजिंग ने क्षेत्र में व्याप्त तनाव पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है.
इस बीच, यहां विशेषज्ञों ने दावा किया कि हमलों में इस्तेमाल किए गए अमेरिकी बंकर-बस्टर बम जमीन के अंदर छिपे परमाणु संयंत्रों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते. अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के फोर्दो, इस्फहान और नतांज परमाणु केद्रों पर हमला कर इन्हें नष्ट कर दिया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने तीन परमाणु केंद्रों पर ”बहुत सफल” हमला किया है. मीडिया में जारी खबरों के अनुसार, ईरान के परमाणु केंद्रों पर किए गए अमेरिकी हमलों में बी2 स्टील्थ बमवर्षक का इस्तेमाल किया गया है.
चीन ने ईरान पर किए गए अमेरिकी हमलों के संबंध में अभी तक आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है. वहीं, चीन के सरकारी अखबार ‘चाइना डेली’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किया गया एकतरफा सैन्य हमला एक लापरवाही भरा कदम है तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुले तौर पर उल्लंघन करना है. चीन ने ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए शनिवार को युद्ध विराम का आ”ान किया था.
ईरान में हुए हमले में फ्रांस शामिल नहीं : फ्रांसीसी विदेश मंत्री बरोट
फ्रांस के विदेश मंत्री जे. नोएल बरोट ने रविवार को कहा कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी हमले में उनका देश शामिल नहीं था. बरोट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि फ्रांस को ईरान के तीन परमाणु ठिकानों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की ”चिंताजनक जानकारी” मिली है.
फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने कहा, ”फ्रांस न तो इन हमलों में शामिल था और न ही ऐसा करने की उसकी कोई योजना है.” उन्होंने कहा कि फ्रांस ”दोनों पक्षों से संयम बरतने का आग्रह करता है, ताकि तनाव बढ़ने से बचा जा सके.” बरोट ने कहा, ”फ्रांस का मानना ??है कि इस मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए परमाणु अप्रसार संधि के ढांचे के भीतर बातचीत करने की जरूरत है. हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इसमें योगदान देने के लिए तैयार है.”
