राष्ट्रवाणी: केंद्र सरकार ने एथनॉल उत्पादन के लिए चावल और खराब अनाज के उपयोग पर नई सीमाएं तय की हैं, साथ ही गन्ने से एथनॉल बनाने पर भी रोक लगाई है। एथेनॉल प्रोडक्शन पर चावल को लेकर नई सख्ती (एआई Image) चावल और खराब अनाज से एथनॉल उत्पादन पर सीमा तय। गन्ने से एथनॉल बनाने पर रोक, मक्का पर निर्भरता बढ़ी।
मक्का की मांग 22% बढ़ेगी, कीमतों में उछाल संभव। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लगातार प्रमोट किया जा रहा है। इसी के साथ एथनॉल प्रोडक्शन को लेकर भी लगातार कई निर्देश दिए गए हैं।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल और अनाज के इस्तेमाल की सीमा तय करने के कारण साल 2026-27 में मक्का की मांग बढ़ने की संभावना है। वहीं, एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने से मिलने वाले ज्यादातर कच्चे माल की खरीद बंद किए जाने से मक्का के लिए पोल्ट्री, डेयरी और स्टार्च उद्योगों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
सरकार ने 3 नवंबर को जारी नई टेंडर शर्तों में पहले तीन तिमाहियों के दौरान FCI के अतिरिक्त चावल से 324 करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन की सीमा तय की है। वहीं, खराब खाद्यान्न से पूरे साल में अधिकतम 160 करोड़ लीटर एथनॉल बनाया जा सकेगा। इस तरह दोनों स्रोतों से कुल 484 करोड़ लीटर एथनॉल ही बनाया जा सकेगा।
यह तेल कंपनियों की ओर से जारी 1,100 करोड़ लीटर के कुल टेंडर का करीब 44% है। खराब खाद्यान्न से एथनॉल उत्पादन की सीमा हर तिमाही 40 करोड़ लीटर रखी गई है। कृषि बाजार एक्सपर्ट्स और एक लिस्टेड कंपनी के इंडीपेंडेंट डायरेक्टर GK सूद ने मीडिया से कहा कि खराब खाद्यान्न का इस्तेमाल खाने और पशु आहार दोनों में होता है।
इसलिए इस पर सीमा लगना खाद्यान्न की उपलब्धता को लेकर चिंता का पहला संकेत है। नई शर्तों के मुताबिक, किसी भी एथनॉल उत्पादक की एक तिमाही की कुल पेशकश में FCI के अतिरिक्त चावल से बने एथनॉल की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इसके अलावा, पहले तीन तिमाहियों में हर तिमाही इस स्रोत से अधिकतम 108 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद होगी।
अगर कंपनियों की पेशकश तय सीमा से ज्यादा हुई तो सभी की मात्रा उसी अनुपात में घटाई जाएगी। सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के लिए 72 लाख टन अतिरिक्त चावल आवंटित किया है। इसका इस्तेमाल 30 जून 2027 तक किया जा सकेगा।
सरकार ने नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 के एथनॉल सप्लाई वर्ष में चीनी को एथनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। इसके तहत गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हेवी शीरे से एथनॉल बनाने की पेशकश नहीं मांगी गई है। 16 अक्टूबर को तेल कंपनियों की ओर से जारी टेंडर में भी इन सोर्स से एथनॉल की खरीद शून्य रखने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, सी-हेवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक नहीं है। चीनी निकालने के बाद बचने वाले इस शीरे का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। सूद के अनुमान के मुताबिक, इससे बनने वाले इथेनॉल में से केवल करीब 50 करोड़ लीटर ही तेल कंपनियों को मिल पाएगा।
इसकी वजह यह है कि सी-हेवी शीरे से बनने वाला इथेनॉल सस्ता होता है और शराब सहित दूसरे उद्योगों से भी इसकी मांग रहती है। इन बदलावों के बाद एथनॉल इंडस्ट्री की जरूरत पूरी करने के लिए मक्का पर निर्भरता बढ़ेगी। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, 2026-27 में एथनॉल उत्पादन के लिए करीब 1.6 करोड़ टन मक्का की जरूरत पड़ सकती है।
चालू सप्लाई वर्ष में यह मांग करीब 1.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यानी इसमें लगभग 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। एक टन मक्का से करीब 380 लीटर इथेनॉल बनता है।
इस हिसाब से 1.6 करोड़ टन मक्का से करीब 610 करोड़ लीटर इथेनॉल तैयार हो सकता है। यह मांग पोल्ट्री और डेयरी फीड, स्टार्च तथा अन्य उद्योगों की जरूरतों के अतिरिक्त होगी। मक्का की बढ़ती मांग का असर कीमतों पर भी दिखने लगा है।
प्रमुख मंडियों में इसकी कीमत 30 से 31 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 24.10 रुपये प्रति किलो है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, इथेनॉल, पशु आहार, स्टार्च और दूसरे इंडस्ट्रियल इस्तेमाल को मिलाकर मक्का की कुल मांग 2026 में 4.9 से 5 करोड़ टन के मुकाबले 2027 में बढ़कर करीब 5.57 करोड़ टन हो सकती है।
वहीं, अल नीनो और मिट्टी में नमी की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुमानों में इस साल मक्का की उपलब्धता करीब 15 फीसदी तक घटने की संभावना जताई गई है। एथनॉल खरीद के लिए अतिरिक्त टेंडर की संभावना उद्योग का मानना है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य पूरे सप्लाई वर्ष में बनाए रखने के लिए तेल कंपनियों का मौजूदा 1,100 करोड़ लीटर का टेंडर पर्याप्त नहीं हो सकता।
ऐसे में कंपनियां करीब 100 करोड़ लीटर का अतिरिक्त टेंडर जारी कर सकती हैं। इससे कुल खरीद जरूरत बढ़कर करीब 1,200 करोड़ लीटर हो जाएगी और मक्का समेत अन्य कच्चे माल पर दबाव और बढ़ सकता है।

