महासमुंद

पतेरापाली गांव में केबल वायर चोरी के आरोप में दलित कौशल सहिस (50) की पीट-पीटकर हत्या के मामले ने अब सामाजिक रंग ले लिया है। पुलिस की जांच और कार्रवाई से असंतुष्ट समाज के लोगों ने बुधवार शाम सिटी कोतवाली पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की। समाजजनों ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

बुधवार शाम करीब 6 बजे छत्तीसगढ़ घासी, घसिया, सहिस, सारथी समाज कल्याण समिति, छत्तीसगढ़ सर्व अनुसूचित जाति समाज और छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंचे। इस दौरान जिलाध्यक्ष तुलेन्द्र सागर, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज के जिलाध्यक्ष विजय बंजारे, लेखराज बघेल सहित अन्य पदाधिकारियों ने डीएसपी अजय शंकर त्रिपाठी से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।

समाजजनों ने कहा कि पतेरापाली में कौशल सहिस को हाथ बांधकर बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद भी पुलिस ने मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शव मिलने के बाद उसकी सूक्ष्म जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन पुलिस ने जल्दबाजी में शव को लावारिस हालत में दफना दिया।

समाज प्रमुखों ने डीएसपी से सवाल किया कि इतनी बड़ी घटना जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर हुई, फिर भी पुलिस को भनक तक क्यों नहीं लगी? उन्होंने यह भी पूछा कि साइबर सेल और अन्य जांच इकाइयाँ क्या कर रही थीं, जबकि घटना के पांच दिन बाद भी किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

समाज ने आरोप लगाया कि यदि यही घटना किसी प्रभावशाली या संपन्न व्यक्ति के साथ होती तो पुलिस तत्काल कार्रवाई करती। लेकिन एक गरीब दलित व्यक्ति की हत्या पर पुलिस कछुआ गति से जांच कर रही है। समाजजनों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

इस पर डीएसपी अजय शंकर त्रिपाठी ने समाज प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, और जैसे ही ठोस सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने क्षेत्र में जातीय और सामाजिक असंतोष को हवा दे दी है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।



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