काहिरा: इजराइल ने अस्पतालों पर किए गए हमलों के दौरान गिरफ्तार दर्जनों डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिक्स और अन्य मेडिकल र्किमयों को ‘गाजा युद्धविराम संधि’ के तहत रिहा कर दिया है। हालांकि, 100 से अधिक चिकित्सा कर्मी अभी भी इजराइली जेलों में बंद हैं, जिनमें कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक डॉ. हुसाम अबू सफिया भी शामिल हैं, जो इजराइली घेराबंदी और बमबारी के बीच मरीजों का इलाज जारी रखने के लिए सुर्खियों में रहे थे।

व्यापक स्तर पर उनकी रिहाई की मांगों के बावजूद, अबू सफिया उन सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों में नहीं थे जिन्हें हमास द्वारा पकड़े गए 20 बंधकों के बदले सोमवार को रिहा किया गया। गाजा के उत्तरी भाग में कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक अबू सफिया को लगभग 10 महीने से बिना किसी आरोप के इजराइल ने हिरासत में रखा है।

स्वास्थ्य र्किमयों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले संगठन ‘हेल्थ वर्कर्स वॉच’ ने बताया कि 31 डॉक्टर और नर्स सहित 55 चिकित्सा कर्मी सोमवार को रिहा किए जाने वाले कैदियों की सूची में थे। हालांकि यह पुष्टि नहीं हो सकी कि क्या सभी को रिहा किया गया है।
संगठन ने कहा कि कम से कम 115 मेडिकल कर्मी अभी भी हिरासत में हैं। साथ ही चार मेडिकल कर्मी ऐसे भी हैं जो इजराइली जेलों में रहते हुए दम तोड़ चुके हैं। अधिकार संगठनों और गवाहों ने अकसर जेल में उत्पीड़न की रिपोर्ट दी है।

अल-अवदा अस्पताल के र्किमयों ने अपने रिहा किए गए निदेशक अहमद मुहाना को कंधों पर उठाकर जश्न मनाया, जिन्हें इजराइल ने 2023 के अंत में अस्पताल पर हमले के बाद लगभग 22 महीने तक हिरासत में रखा था। मुहाना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, ‘‘अल-अवदा अस्पताल को पुन? स्थापित किया जाएगा, इसके कर्मचारी इसे अपने हाथों से फिर से बनाएंगे… मुझे, हम सब की उपलब्धियों पर गर्व करता हूं और यह आगे भी रहेगा।’’

अल-अवदा अस्पताल गाजा के जाबालिया शरणार्थी कैंप में कई हमलों के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था। यह अस्पताल मई से बंद है जब इसे इजराइल की हालिया सैन्य कार्रवाई के दौरान खाली करना पड़ा था। सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल की दो साल की सैन्य मुहिम ने गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। इस दौरान अधिकतर अस्पताल बंद हो गए और कई क्षतिग्रस्त हुए, जबकि कर्मचारी घायल मरीजों का इलाज आपूर्ति की कमी के बीच करते रहे। इस युद्ध के दौरान, इजराइली बलों ने कई अस्पतालों पर हमले किए और सैकड़ों र्किमयों को गिरफ्तार किया।

इजराइल का कहना है कि उसने अस्पतालों को निशाना इसलिए बनाया क्योंकि हमास सैन्य उद्देश्यों के लिए उनका उपयोग कर रहा था, जबकि फलस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस आरोप से इनकार किया है। कमाल अदवान अस्पताल के 52 वर्षीय डॉ. हुसाम अबू सफिया की रिहाई की कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर कहा कि ‘‘रिहाई की तारीख के बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं है।’’ रिहा हुए कैदियों ने बताया अबू सफिया ‘स्वस्थ’ हैं।

इजराइली सेना ने आरोप लगाया है कि अबू सफिया हमास के साथ सहयोग या काम कर रहे हैं, जबकि उनके साथ काम करने वाले कर्मी और अंतरराष्ट्रीय सहायता समूह इस आरोप को खारिज करते हैं। नवंबर 2023 में इजराइली बलों ने गाजा शहर के शिफा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सेलमिया को हमास का अधिकारी बताते हुए गिरफ्तार किया था, लेकिन उन्हें सात महीने बाद रिहा कर दिया गया।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अबू सफिया ने कमाल अदवान अस्पताल को 85 दिनों तक इजराइली सेना की घेराबंदी में संभाला। जब 27 दिसंबर को इजराइली बलों ने अस्पताल पर हमला किया तो तस्वीरों में उन्हें सफेद कोट में अस्पताल से बाहर निकलते और मलबे के बीच से गुजरते हुए एक इजराइली बख्तरबंद वाहन की ओर जाते दिखाया गया, जहां उन्होंने मरीजों की निकासी पर चर्चा की। अबू सफिया और दर्जनों अन्य मरीज और कर्मचारी कैद कर लिए गए।

गाजा सिटी के ‘पेशेंट्स फ्रेंड्स अस्पताल’ के निदेशक डॉ. सईद सलाह, अबू सफिया को 29 वर्षों से जानते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अबू सफिया आखिरी समय तक अस्पताल में रहे। उन्होंने इसलिए अस्पताल नहीं छोड़ा क्योंकि अगर वे जाते तो सभी स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो जातीं। वह वास्तव में एक महान व्यक्ति हैं।’’

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